Tuesday, August 4, 2026
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के प्रति अविश्वास

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रायपुर। CG MNEWS:  छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के विरुद्ध प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव को सदन द्वारा अस्वीकार किए जाने को भारतीय लोकतंत्र की परिपक्वता, संसदीय परंपराओं और संस्थागत मर्यादा के प्रति गहरी आस्था का सशक्त उदाहरण बताया है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि यह निर्णय केवल एक संसदीय प्रक्रिया का परिणाम नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि भारतीय लोकतंत्र में संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्षता और मर्यादा सर्वोपरि है। सदन में जिस स्पष्टता, गंभीरता और विवेक के साथ माननीय सदस्यों ने अपना मत व्यक्त किया, उससे यह पुनः स्थापित हुआ है कि संसद और उसकी संस्थाओं के प्रति देश की लोकतांत्रिक चेतना अत्यंत परिपक्व है।

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उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय के उपरांत लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सदन को जिस संतुलित, विचारपूर्ण और गरिमामय ढंग से संबोधित किया गया, वह अत्यंत प्रेरक है। अध्यक्ष पद की निष्पक्षता, संसदीय नियमों की सर्वोच्चता और संसद की गौरवशाली परंपराओं के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भारतीय संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना को प्रतिबिंबित करती है।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें केवल आधुनिक संवैधानिक ढांचे में ही नहीं, बल्कि हमारी दीर्घ बौद्धिक और नैतिक परंपरा में भी निहित हैं, जहाँ शासन और सार्वजनिक जीवन को सत्य, उत्तरदायित्व, संवाद और मर्यादा के आधार पर संचालित करने की कल्पना की गई है।

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उन्होंने भारतीय संसदीय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्रीय विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में विट्ठलभाई पटेल ने अपने आचरण से यह स्थापित किया था कि अध्यक्ष का पद केवल कार्यवाही संचालित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सदन की निष्पक्षता, स्वतंत्रता और गरिमा का प्रतीक होता है। उन्होंने दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर नियमों और परंपराओं की रक्षा का जो आदर्श प्रस्तुत किया, उसने भारतीय संसदीय जीवन में अध्यक्ष पद की निष्पक्षता की स्थायी परंपरा स्थापित की।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि संविधान सभा की बहसों में भी लोकतंत्र के इन आदर्शों को अत्यंत गंभीरता और दूरदृष्टि के साथ अभिव्यक्त किया गया था। डॉ. भीमराव अम्बेडकर ने स्पष्ट कहा था कि संविधान कितना भी उत्कृष्ट क्यों न हो, यदि उसे संचालित करने वाले लोग उसके प्रति निष्ठावान नहीं होंगे, तो वह सफल नहीं हो सकेगा। यही दृष्टि आज भी हमारे संसदीय आचरण के लिए मार्गदर्शक है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में भी अनेक अवसर ऐसे आए हैं, जब लोकतांत्रिक परिपक्वता का उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है। प्रथम लोकसभा के गठन के समय श्री जी.वी. मावलंकर ने अध्यक्ष पद की गरिमा पर बल देते हुए कहा था कि अध्यक्ष का आसन किसी दल या व्यक्ति का प्रतिनिधि नहीं होता, बल्कि पूरे सदन की सामूहिक चेतना और विश्वास का प्रतीक होता है।

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि वह असहमति को स्थान देता है, विविध विचारों का सम्मान करता है और संवाद के माध्यम से सहमति का मार्ग खोजता है। संसद इसी लोकतांत्रिक चेतना का सर्वोच्च मंच है, जहाँ व्यक्त प्रत्येक विचार देश के करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में संसद अपनी गौरवशाली संसदीय परंपराओं को और अधिक सुदृढ़ करेगी तथा लोकतांत्रिक संवाद, रचनात्मक विमर्श और संस्थागत गरिमा के उन आदर्शों को नई ऊर्जा मिलेगी, जिन पर भारतीय लोकतंत्र की प्रतिष्ठा आधारित है।

डॉ. रमन सिंह ने ओम बिरला को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में लोकसभा संविधान के प्रति अपनी निष्ठा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती रहेगी।

नोरा फतेही के गाने पर बवाल, यूजर्स

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मुंबई। Song Controversy: बॉलीवुड एक्ट्रेस और डांसर नोरा फतेही का नया आइटम सॉन्ग सरके चुनर तेरी सरके’ रिलीज होते ही विवादों में घिर गया है। फिल्म केडी: डेविल’ के इस गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, लेकिन इसके लीरिक्स और डांस स्टेप्स को लेकर यूजर्स ने कड़ी आलोचना शुरू कर दी है। कई लोगों ने इसे अश्लील बताते हुए नाराजगी जताई है, वहीं कुछ यूजर्स ने तो यहां तक कह दिया कि “पोर्न इससे साफ होता है।” गाने में नोरा फतेही के साथ संजय दत्त भी नजर रहे हैं, जिसे लेकर भी सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

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रविवार 16 मार्च को रिलीज हुए इस गाने को जहां कुछ फैंस ने नोरा के डांस और स्टाइल के लिए सराहा, वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इसके डबल मीनिंग लीरिक्स और सजेस्टिव डांस मूव्स को लेकर आपत्ति जताई है। गाने का सेटअप एक डांस बार का दिखाया गया है, जहां नोरा कई बैकअप डांसर्स के साथ परफॉर्म करती नजर आती हैं। गाना रिलीज होने के बाद यूट्यूब और सोशल मीडिया पर इसके लीरिक्स को लेकर लगातार आलोचना हो रही है। कई यूजर्स ने कमेंट करते हुए लिखा कि गाने के शब्द बेहद सस्ते और अश्लील हैं।

बादशाह 'टटीरी' के बाद नोरा के 'सरके चुनर तेरी सरके' पर बवाल, भद्दी लिरिक्स  पर फूटा लोगों का गुस्सा, की सख्त कार्रवाई की मांग - India TV Hindi

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इस विवाद के बीच सिंगर अरमान मलिक ने भी गाने की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह गाना उनकी टाइमलाइन पर आया और उन्हें दोबारा सुनना पड़ा यह समझने के लिए कि उन्होंने सही सुना है या नहीं। उन्होंने कहा कि कमर्शियल सॉन्गराइटिंग का स्तर इतना नीचे गिरता देख दुख होता है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि वह सच में शब्दों की कमी महसूस कर रहे हैं और काश वह इस गाने को अनसुना कर पाते।

इस गाने को सिंगर मंगली ने अपनी आवाज दी है, जबकि इसके लीरिक्स रकीब आलम ने लिखे हैं और अर्जुन जन्या ने म्यूजिक दिया है। गाने की आलोचना के बीच कई यूजर्स ने इसे बैन करने की भी मांग की है। वहीं फिल्म केडी: डेविल’ के डायरेक्टर प्रेम को भी सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। KVN प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म में ध्रुव सरजा लीड रोल में हैं और इसमें शिल्पा शेट्टी, वी रविचंद्रन, रमेश अराविंद, रेशमा नानैया के साथ संजय दत्त और नोरा फतेही भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। यह फिल्म 30 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

रफ्तार का कहर! ट्रक की टक्कर से युवक

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अभनपुर। Road Accident: रायपुर जिले के गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र में सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसमें साफ तौर पर ट्रक चालक की लापरवाही नजर रही है।

बताया जा रहा है कि हादसा सोमवार शाम करीब 7 बजे हुआ, जब तेज रफ्तार ट्रक ने युवक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए।

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सूचना मिलते ही गोबरा नवापारा थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज के आधार पर ट्रक चालक की तलाश कर रही है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

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CAF Soldier Suicide: छुट्टी से लौटते ही उठाया खौफनाक कदम, CAF जवान ने खुद को मारी गोली

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खैरागढ़। CG NEWS: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के छूईखदान क्षेत्र में सोमवार शाम उस समय सनसनी फैल गई, जब उदयपुर स्थित राजपरिवार के पैलेस की सुरक्षा में तैनात छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) के एक जवान ने अपनी ही सर्विस रायफल से खुद को गोली मार ली। गोली चलने की तेज आवाज सुनते ही पूरे पैलेस परिसर में अफरा-तफरी मच गई। साथी जवान मौके पर पहुंचे तो देखा कि जवान खून से लथपथ जमीन पर पड़ा हुआ है। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृत जवान की पहचान कृपाचंद सोनवानी (38) के रूप में हुई है, जो CAF की 6वीं बटालियन में पदस्थ था और मूल रूप से भिलाई का रहने वाला था। घटना सोमवार शाम करीब 5:30 से 6 बजे के बीच की बताई जा रही है। इस मामले की पुष्टि पुलिस महानिरीक्षक बालाजीराव सोमावार ने की है।

दरअसल, पूर्व विधायक देवव्रत सिंह के निधन के बाद राजपरिवार में चल रहे पारिवारिक विवाद के कारण प्रशासन ने उदयपुर पैलेस और खैरागढ़ के कमल विलास पैलेस को सील कर रखा है। इन परिसरों की सुरक्षा के लिए CAF जवानों की तैनाती की गई है और अलग-अलग शिफ्ट में ड्यूटी लगाई जाती है। बताया जा रहा है कि सोमवार को भी कृपाचंद सोनवानी सामान्य रूप से अपनी ड्यूटी कर रहा था, लेकिन साथी जवानों के मुताबिक वह कुछ समय से तनाव में दिखाई दे रहा था। हालांकि उस समय किसी ने इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।

इसी दौरान अचानक गोली चलने की आवाज आई, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। साथी जवान जब मौके पर पहुंचे तो उन्होंने देखा कि कृपाचंद सोनवानी ने अपनी ही सर्विस रायफल से खुद को गोली मार ली थी। तुरंत एंबुलेंस बुलाकर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

जानकारी के मुताबिक कृपाचंद सोनवानी रविवार को ही छुट्टी से लौटकर ड्यूटी पर आया था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि घरेलू या निजी कारणों के चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि घटनास्थल से अभी तक कोई सुसाइड नोट या अन्य ठोस सुराग नहीं मिला है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवा दिया है और मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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एक ही नाम से बनीं 10 फिल्में! अलग-अलग दौर

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मुंबई। Same Name Movies: फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि अलग-अलग समय पर कई फिल्में एक ही नाम से बनाई जाती हैं। कहानी, कलाकार और निर्देशक बदल जाते हैं, लेकिन फिल्म का टाइटल वही रहता है। बॉलीवुड और अन्य फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं, जहां एक ही नाम से कई फिल्में बनीं और रिलीज भी हुईं। यह संयोग कई बार दर्शकों के लिए दिलचस्प भी बन जाता है और कभी-कभी भ्रम भी पैदा कर देता है।

सबसे पहले बात करते हैं कर्ज” (Karz) की। साल 1980 में सुभाष घई के निर्देशन में बनी इस फिल्म में ऋषि कपूर और टीना मुनीम नजर आए थे। यह फिल्म अपने संगीत और पुनर्जन्म की कहानी के कारण काफी लोकप्रिय हुई थी। इसके कई साल बाद 2008 में इसी नाम से एक और फिल्म बनी, जिसमें हिमेश रेशमिया और उर्मिला मातोंडकर मुख्य भूमिका में थे। हालांकि दूसरी फिल्म को उतनी सफलता नहीं मिल सकी।

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इसी तरह देवदास” नाम से भी कई फिल्में बन चुकी हैं। शरत चंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर उपन्यास पर आधारित इस कहानी पर 1935, 1955 और 2002 में बड़ी फिल्में बनीं। 1955 में दिलीप कुमार की देवदास को क्लासिक माना जाता है, जबकि 2002 में संजय लीला भंसाली की फिल्म में शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय और माधुरी दीक्षित नजर आए थे।

अग्निपथ” भी ऐसा ही एक उदाहरण है। 1990 में अमिताभ बच्चन की फिल्म अग्निपथ ने बड़ी पहचान बनाई थी। इसके बाद 2012 में इसी नाम से ऋतिक रोशन की फिल्म रिलीज हुई, जो बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई।

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डॉन” नाम की फिल्म भी दो अलग-अलग दौर में बनी। 1978 में अमिताभ बच्चन की डॉन सुपरहिट रही थी। इसके बाद 2006 में शाहरुख खान के साथ फरहान अख्तर ने इसी नाम से नई फिल्म बनाई, जिसने नए अंदाज में दर्शकों को आकर्षित किया।

इसके अलावा हिम्मतवाला” नाम से भी दो फिल्में बनीं। 1983 में जितेंद्र और श्रीदेवी की फिल्म हिम्मतवाला बेहद सफल रही थी। बाद में 2013 में अजय देवगन और तमन्ना भाटिया के साथ इसी नाम से फिल्म बनाई गई, हालांकि यह फिल्म दर्शकों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकी।

जंजीर” नाम भी बॉलीवुड में दो बार चर्चा में आया। 1973 में अमिताभ बच्चन की जंजीर ने उन्हें “एंग्री यंग मैन” की पहचान दिलाई थी। इसके कई दशक बाद 2013 में राम चरण और प्रियंका चोपड़ा के साथ इसी नाम से फिल्म बनाई गई।

कुली नंबर 1” भी ऐसा ही टाइटल है। 1995 में गोविंदा और करिश्मा कपूर की यह फिल्म सुपरहिट रही थी। 2020 में इसी नाम से वरुण धवन और सारा अली खान के साथ इसका नया वर्जन बनाया गया।

इसके अलावा शोले”, “हीरो”, “दिलवाले” जैसे कई नाम ऐसे हैं जिन्हें अलग-अलग समय में फिल्मों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया गया। फिल्म निर्माताओं का मानना है कि किसी लोकप्रिय या प्रभावशाली नाम को दोबारा इस्तेमाल करने से दर्शकों में उत्सुकता बढ़ती है और फिल्म को शुरुआती पहचान मिलती है।

हालांकि कई बार ऐसा भी होता है कि पुरानी फिल्म की लोकप्रियता के कारण नई फिल्म की तुलना उससे होने लगती है। अगर नई फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो उसे आलोचना का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद बॉलीवुड में एक ही नाम से फिल्म बनाने का ट्रेंड लगातार चलता रहा है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो सिनेमा की दुनिया में एक ही नाम से बनी फिल्मों का यह सिलसिला दर्शकों के लिए हमेशा दिलचस्प रहा है। अलग-अलग दौर के कलाकार, नई तकनीक और बदलती कहानियों के साथ वही नाम फिर से पर्दे पर आता है और दर्शकों को पुरानी यादों के साथ नया अनुभव भी देता है।

बाइक सवार को ट्रक ने कुचला, मौके पर

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रायपुर / अभनपुर। RAIPUR NEWS : गोबरा नवापारा में राष्ट्रीय राजमार्ग कुर्रा महानदी पुल फोर लेन रोड पर एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना हुई है। जानकारी के अनुसार, बूढ़ेनी निवासी युवक अपनी बाइक से जा रहे थे, तभी एक ट्रक ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी।

घटना स्थल पर ही मन्नू देवांगन की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।

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छात्रावास की तीन छात्राएँ गर्भवती नहीं ?

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रायपुर। CG NEWS : पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास की तीन छात्राएँ गर्भवती हैं। इस संबंध में शिक्षा विभाग द्वारा मामले की तथ्यात्मक जांच कराई गई, जिसमें उक्त खबर भ्रामक एवं निराधार पाई गई है।

उक्त मामले में आज विधानसभा के सदन में सरकार की ओर से स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि मामले में प्रस्तुत तथ्यों की विस्तृत जांच की गई है। मंत्री ने कहा कि जिन तीन छात्राओं का उल्लेख किया जा रहा है, उनमें से दो छात्राएँ पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास की निवासी नहीं हैं। वे स्वामी आत्मानंद हिन्दी माध्यम विद्यालय, गंगालूर में अध्ययनरत हैं और अपने घर से ही विद्यालय आना-जाना करती हैं।

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मंत्री ने आगे बताया कि समाचार में उल्लेखित तीसरी छात्रा पूर्व में पोर्टा केबिन हाई स्कूल छात्रावास में अध्ययनरत थी, लेकिन 18 अक्टूबर 2025 को दीपावली अवकाश में घर जाने के बाद से वह छात्रावास वापस नहीं आई। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को छात्रा ने छात्रावास में उपस्थित होकर स्वेच्छा से घर से आना-जाना करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। तब से वह छात्रावास में निवास नहीं कर रही है।

मंत्री के अनुसार छात्रा को छात्रावास से निष्कासित नहीं किया गया है, बल्कि उसने स्वयं छात्रावास छोड़कर अन्यत्र रहकर पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित छात्राओं एवं उनके अभिभावकों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

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छत्तीसगढ़ के IPS संतोष सिंह को बड़ी जिम्मेदारी, CISF में

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रायपुर। छत्तीसगढ़ कैडर के 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी संतोष सिंह को बड़ी जिम्मेदारी मिली है। वो केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में डीआईजी की जिम्मेदारी संभालेंगे। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को लेकर गृह मंत्रालय ने आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। आपको बता दें कि अभी संतोष सिंह छत्तीसगढ़ पुलिस मुख्यालय में डीआईजी सीसीटीएनएस/एससीआरबी के पद पर पदस्थ हैं। उनके केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने को मंजूरी देते हुए गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि उन्हें जल्द से जल्द नई जिम्मेदारी संभालने के लिए रिलीव किया जाए।

गृह मंत्रालय ने जारी किया आदेश

 गृह मंत्रालय मंत्रालय की ओर से छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि आईपीएस संतोष सिंह को तत्काल प्रभाव से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजते हुए उन्हें नई जिम्मेदारी ग्रहण करने के लिए रिलीव किया जाए। सीआईएसएफ देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और अन्य संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अर्धसैनिक बल है।

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नशे के खिलाफ ‘निजात अभियान’ से मिली पहचान

आईपीएस संतोष सिंह अपने कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण अभियानों के लिए जाने जाते हैं। विशेष रूप से अवैध नशे के खिलाफ चलाए गए उनके निजात अभियान’ ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हासिल की थी। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से जागरूक करना और समाज को नशा मुक्त बनाने की दिशा में ठोस पहल करना था।इस अभियान के प्रभाव और सफलता को देखते हुए संतोष सिंह को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मानित किया गया था। उन्हें आईएससीपी अवार्ड से नवाजा गया था, जो अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले अधिकारियों को दिया जाता है।

सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ

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मुंबई। Bollywood Film Update: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नाम बदल दिया गया है। अब यह फिल्म ‘मातृभूमि: May War Rest in Peace’ के नाम से रिलीज की जाएगी। फिल्म के मेकर्स ने आधिकारिक तौर पर नए टाइटल की घोषणा करते हुए सलमान खान का दमदार नया पोस्टर भी जारी किया है, जिसमें फिल्म की टैगलाइन “May War Rest in Peace” खास चर्चा में है। इस टैगलाइन के जरिए युद्ध के बजाय शांति का संदेश देने की कोशिश की गई है।

बताया जा रहा है कि गलवान घाटी की घटना से प्रेरित इस फिल्म के नाम को लेकर चीन की प्रतिक्रिया और विवाद के बाद मेकर्स ने टाइटल बदलने का फैसला लिया। सोशल मीडिया पर इस घोषणा के बाद फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है और कई लोग इस फैसले की सराहना कर रहे हैं।

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अपूर्व लाखिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह अहम भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म के कुछ गाने और टीजर पहले ही रिलीज हो चुके हैं, जिन्हें दर्शकों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला है, और अब फैंस को इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर संसद में बृजमोहन की सक्रियता

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नई दिल्ली/ रायपुर 16 मार्च : स्वच्छ पर्यावरण, शुद्ध हवा और प्रकृति के संरक्षण को लेकर रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देने के लिए पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इसी क्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोमवार को लोकसभा में ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) के अंतर्गत पर्यावरण को और बेहतर करने के लिए कार्बन को कम करने वाले पौधों को लगाने का मुद्दा उठाया।

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अग्रवाल के प्रश्न के जवाब में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और वन पुनर्स्थापन को बढ़ावा देने के लिए देश के विभिन्न राज्यों में अवक्रमित वन क्षेत्रों का चयन किया गया है।

ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) में समूचे देश में 4391 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण किया जा रहा है। प्रोग्राम में छत्तीसगढ़ में 536 हेक्टेयर भूमि में वन उगाये जा रहे हैं। गुजरात में सबसे ज्यादा 975 हेक्टेयर भूमि में और मध्यप्रदेश में 640 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्बन को कम करने वाले पौधों को लगाया जा रहा है।

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मंत्री ने बताया कि कार्बन को कम करने वाले पौधों की दीर्घकाल तक जीवित रहने की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे इलाके के 40% कैनोपी घनत्व पर बाकायदा ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) के अंतर्गत स्थापित पारिस्थितिक लक्षण को प्राप्त करने के लिए विभिन्न क्रेडिट कार्ड भी
जारी किए जाते हैं।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है। ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के माध्यम से वृक्षारोपण और वन पुनर्स्थापन के कार्यों को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे वातावरण में हरियाली बढ़ेगी और लोगों को स्वच्छ व शुद्ध हवा मिल सकेगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से सरकारी और निजी संस्थाओं की भागीदारी से पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस कार्यक्रम से न केवल वन क्षेत्रों का संरक्षण होगा बल्कि कार्बन फुटप्रिंट में कमी आएगी, जल स्रोतों का संरक्षण होगा और स्थानीय समुदायों को भी रोजगार व आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे।

उन्होंने कहा कि उनका निरंतर प्रयास रहेगा कि रायपुर लोकसभा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनहित से जुड़े विषयों को संसद में मजबूती से उठाया जाए, ताकि प्रदेश को केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।

बता दें कि, केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत 12 अक्टूबर 2023 को ग्रीन क्रेडिट नियम लागू किया था। जिसका उद्देश्य स्वैच्छिक आधार पर पर्यावरण के अनुकूल कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करना है।

ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत वृक्षारोपण और अवक्रमित वन भूमि के पारिस्थितिक पुनर्स्थापना की प्रक्रिया का भी विकास किया जाता है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद देहरादून ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के तहत प्रशासक है और इन नियमों के तहत ग्रीन क्रेडिट कार्यक्रम के प्रबंधन, संचालन और जारी करने सहित इसके प्रभावी कार्यान्वयन के लिए अन्य उत्तरदायी

भी है। ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) के लिए वन भूमियों पर किए जाने वृक्षारोपण कार्यों की उपयोगिता के आधार पर स्थानीय प्रजातियों के मिश्रण का उपयोग करना आवश्यक है। ताकि परिस्थितियों के अनुकूल वृक्षों के जरिए पर्यावरण का बेहतर संरक्षण किया जा सके। ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम (जीसीपी) में आवेदक को ग्रीन क्रेडिट तभी प्राप्त हो सकते हैं जब कम से कम 5 वर्षों का पुनर्स्थापना कार्य पूरा हो चुका हो और कम से कम 40% का कैनोपी घनत्व प्राप्त हो गया हो मतलब सिर्फ 40 फ़ीसदी क्षेत्र में कार्बन को कम करने वाले पौधों का विकास किया गया हो। साथ ही आरोपित पौधों और प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों को परिपक्व होने के लिए 5 वर्ष की स्थापना अवधि निर्धारित की गई।