Sunday, June 7, 2026
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मां बनने की खुशी में खिलीं सुरभि ज्योति, मेटरनिटी फोटोशूट ने जीता फैंस का दिल

Surbhi jyoti maternity photoshoot

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Surbhi jyoti maternity photoshoot

PregnancyGlow: टीवी इंडस्ट्री की फेमस एक्ट्रेस सुरभि ज्योति इन दिनों अपनी प्रेग्नेंसी जर्नी को बेहद खास अंदाज में एंजॉय कर रही हैं। 38 साल की उम्र में अपने पहले बच्चे का स्वागत करने जा रहीं सुरभि ने हाल ही में अपना खूबसूरत मेटरनिटी फोटोशूट सोशल मीडिया पर शेयर किया, जिसने फैंस का दिल जीत लिया।

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Surbhi jyoti maternity photoshoot

तस्वीरों में एक्ट्रेस का प्रेग्नेंसी ग्लो साफ नजर आ रहा है। सुरभि ने बेज कलर की साड़ी के साथ ट्रेडिशनल ज्वेलरी पहनी हुई है और बालों में गजरा लगाकर अपने लुक को बेहद एलिगेंट बनाया है। सॉफ्ट ग्लैम मेकअप, न्यूड टोन लुक और हल्की स्मोकी आईज ने उनकी खूबसूरती में चार चांद लगा दिए।

Surbhi jyoti maternity photoshoot

हर तस्वीर में सुरभि बेबी बंप थामे बेहद ग्रेसफुल अंदाज में पोज देती नजर आईं। फैंस उनकी तस्वीरों पर जमकर प्यार बरसा रहे हैं और उन्हें “रॉयल ब्यूटी” बता रहे हैं। इससे पहले उनकी गोदभराई की रस्म की झलकियां भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। अब उनका यह मेटरनिटी शूट इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

Surbhi jyoti maternity photoshoot

15 साल का तूफान टीम इंडिया में! वैभव सूर्यवंशी

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नई दिल्ली। CRICKET: भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। जिस खिलाड़ी की चर्चा कुछ महीने पहले तक केवल घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक सीमित थी, वह अब देश की सीनियर टीम का हिस्सा बन गया है। मात्र 15 साल और 71 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी को भारतीय T20 टीम में चुना गया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के साथ-साथ एशियाई खेलों के लिए टीम की घोषणा की। टीम सूची सामने आते ही सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हुई, वह था वैभव सूर्यवंशी। क्रिकेट विशेषज्ञों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह इसी युवा बल्लेबाज की चर्चा होने लगी।

सचिन का रिकॉर्ड टूटा

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क्रिकेट इतिहास में सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे कम उम्र में भारत के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों में दर्ज था। सचिन ने वर्ष 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल और 205 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। अब वैभव सूर्यवंशी उनसे भी कम उम्र में भारतीय सीनियर टीम में चुने जाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। यही वजह है कि क्रिकेट जगत इस चयन को भारतीय क्रिकेट के भविष्य से जोड़कर देख रहा है। कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि अगर वैभव ने अपने प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखी तो वह आने वाले वर्षों में भारतीय बल्लेबाजी की नई पहचान बन सकते हैं।

IPL 2026 में मचाया था धमाल

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वैभव सूर्यवंशी का चयन किसी चमत्कार का परिणाम नहीं बल्कि लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम माना जा रहा है। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने IPL 2026 में बल्लेबाजी का ऐसा प्रदर्शन किया जिसने दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया। 16 पारियों में 776 रन, 48.50 की औसत और 237.31 की विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने टूर्नामेंट में धूम मचा दी। उनका सर्वोच्च स्कोर 103 रन रहा। उनके नाम एक शतक और पांच अर्धशतक दर्ज हुए। उन्होंने 63 चौके और 72 छक्के लगाए। खास बात यह रही कि उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था।

अवॉर्ड्स की झड़ी

सिर्फ रन ही नहीं, वैभव ने व्यक्तिगत पुरस्कारों पर भी कब्जा जमाया। उन्होंने ऑरेंज कैप जीती, टूर्नामेंट के सबसे मूल्यवान खिलाड़ी (MVP) बने और उभरते खिलाड़ी का अवॉर्ड भी अपने नाम किया। एक अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी उनके खाते में दर्ज हुआ। यही आंकड़े चयनकर्ताओं के फैसले की सबसे बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

चयनकर्ताओं का भरोसा

मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर और BCCI सचिव देवाजीत सैकिया की मौजूदगी में टीम का चयन किया गया। बोर्ड के भीतर भी वैभव को लेकर काफी उत्साह बताया जा रहा है। कई क्रिकेट जानकार उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सुपरस्टार मान रहे हैं। अब माना जा रहा है कि आयरलैंड के खिलाफ होने वाली T20 श्रृंखला में उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक और यादगार क्षण होगा।

अब पूरे देश की नजरें

वैभव सूर्यवंशी अभी सिर्फ 15 साल के हैं, लेकिन उनके कंधों पर करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदें आ चुकी हैं। IPL में उनका बल्ला गरजा, रिकॉर्ड टूटे और अब टीम इंडिया का दरवाजा खुल गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह युवा बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने खेल से कितनी बड़ी छाप छोड़ पाता है। फिलहाल इतना तय है कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल चुका है, जिसकी चमक आने वाले वर्षों तक दिखाई दे सकती है।

15 साल का तूफान टीम इंडिया में! वैभव सूर्यवंशी ने


नई दिल्ली। CRICKET: भारतीय क्रिकेट में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। जिस खिलाड़ी की चर्चा कुछ महीने पहले तक केवल घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक सीमित थी, वह अब देश की सीनियर टीम का हिस्सा बन गया है। मात्र 15 साल और 71 दिन की उम्र में वैभव सूर्यवंशी को भारतीय T20 टीम में चुना गया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के साथ-साथ एशियाई खेलों के लिए टीम की घोषणा की। टीम सूची सामने आते ही सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हुई, वह था वैभव सूर्यवंशी। क्रिकेट विशेषज्ञों से लेकर सोशल मीडिया तक हर जगह इसी युवा बल्लेबाज की चर्चा होने लगी।

सचिन का रिकॉर्ड टूटा

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क्रिकेट इतिहास में सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे कम उम्र में भारत के लिए खेलने वाले खिलाड़ियों में दर्ज था। सचिन ने वर्ष 1989 में पाकिस्तान के खिलाफ 16 साल और 205 दिन की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था। अब वैभव सूर्यवंशी उनसे भी कम उम्र में भारतीय सीनियर टीम में चुने जाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। यही वजह है कि क्रिकेट जगत इस चयन को भारतीय क्रिकेट के भविष्य से जोड़कर देख रहा है। कई पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि अगर वैभव ने अपने प्रदर्शन की निरंतरता बनाए रखी तो वह आने वाले वर्षों में भारतीय बल्लेबाजी की नई पहचान बन सकते हैं।

IPL 2026 में मचाया था धमाल

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वैभव सूर्यवंशी का चयन किसी चमत्कार का परिणाम नहीं बल्कि लगातार शानदार प्रदर्शन का इनाम माना जा रहा है। राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हुए उन्होंने IPL 2026 में बल्लेबाजी का ऐसा प्रदर्शन किया जिसने दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया। 16 पारियों में 776 रन, 48.50 की औसत और 237.31 की विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ उन्होंने टूर्नामेंट में धूम मचा दी। उनका सर्वोच्च स्कोर 103 रन रहा। उनके नाम एक शतक और पांच अर्धशतक दर्ज हुए। उन्होंने 63 चौके और 72 छक्के लगाए। खास बात यह रही कि उन्होंने एक सीजन में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड क्रिस गेल के नाम था।

अवॉर्ड्स की झड़ी

सिर्फ रन ही नहीं, वैभव ने व्यक्तिगत पुरस्कारों पर भी कब्जा जमाया। उन्होंने ऑरेंज कैप जीती, टूर्नामेंट के सबसे मूल्यवान खिलाड़ी (MVP) बने और उभरते खिलाड़ी का अवॉर्ड भी अपने नाम किया। एक अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी उनके खाते में दर्ज हुआ। यही आंकड़े चयनकर्ताओं के फैसले की सबसे बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

चयनकर्ताओं का भरोसा

मुख्य चयनकर्ता अजित आगरकर और BCCI सचिव देवाजीत सैकिया की मौजूदगी में टीम का चयन किया गया। बोर्ड के भीतर भी वैभव को लेकर काफी उत्साह बताया जा रहा है। कई क्रिकेट जानकार उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सुपरस्टार मान रहे हैं। अब माना जा रहा है कि आयरलैंड के खिलाफ होने वाली T20 श्रृंखला में उन्हें अंतरराष्ट्रीय डेब्यू का मौका मिल सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय क्रिकेट के इतिहास का एक और यादगार क्षण होगा।

अब पूरे देश की नजरें

वैभव सूर्यवंशी अभी सिर्फ 15 साल के हैं, लेकिन उनके कंधों पर करोड़ों भारतीय क्रिकेट प्रेमियों की उम्मीदें आ चुकी हैं। IPL में उनका बल्ला गरजा, रिकॉर्ड टूटे और अब टीम इंडिया का दरवाजा खुल गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह युवा बल्लेबाज अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने खेल से कितनी बड़ी छाप छोड़ पाता है। फिलहाल इतना तय है कि भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा मिल चुका है, जिसकी चमक आने वाले वर्षों तक दिखाई दे सकती है।



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ईद मनाकर लौट रहे 49 लोगों की तड़प

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डेस्क। सहारा रेगिस्तान के एक पथरीले इलाके में ट्रक खराब हो जाने की वजह से पानी की बूंद-बूंद को तरसे करीब 49 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. नाइजर के अगाडेज गवर्नर के आधिकारिक बयान के मुताबिक, ये सभी लोग माली से एक मुस्लिम त्योहार ईद मनाकर लौट रहे थे, लेकिन असमका बॉर्डर से लगभग 80 किलोमीटर दूर इनका ट्रक रास्ते से भटक गया और बीच रेगिस्तान में बंद हो गया.

दुनिया के सबसे खतरनाक और बेरहम माने जाने वाले सहारा रेगिस्तान में आग बरस रही थी, मीलों दूर तक न पानी की एक बूंद, न कोई साया…चारों तरफ सिर्फ चिलचिलाती धूप और अंधी रेत! ऐसी भयावह जगह पर 49 मुसाफिरों को ले जा रहा ट्रक बीच रास्ते में खराब हो गया. इसके बाद इन लोगों को जो सजा मिली, वो किसी भी इंसान के लिए सबसे खौफनाक मौत होती है. पानी की एक-एक बूंद के लिए तड़पते, हलक सूखते और चीखते-चिल्लाते इन 49 लोगों ने उसी रेतीले नर्क में तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया.

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कई दिनों तक रेगिस्तान से लड़ते रहे 49 लोग

ये सभी लोग माली देश से एक मुस्लिम त्योहार मनाकर अपने घरों को लौट रहे थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा.

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नाइजर की अगाडेज गवर्नरेट की तरफ से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, ये दिल दहला देने वाला वाकया नाइजर और अल्जीरिया के बीच के मुख्य क्रॉसिंग पॉइंट ‘असमका’ से करीब 80 किलोमीटर पश्चिम में हुआ.

ये बड़ा ट्रक माली के तेलहान्देक शहर से रवाना हुआ था लेकिन रेगिस्तान के भूलभुलैया जैसे रास्तों में गाड़ी अचानक अपने तय रूट से काफी दूर भटक गई और एक बेहद सुनसान जगह पर जाकर पूरी तरह बंद हो गई.

ट्रक खराब होने के बाद ड्राइवर, उसके सहायकों और मुसाफिरों ने हार नहीं मानी. उन्होंने चिलचिलाती गर्मी में कई दिनों तक गाड़ी को दोबारा चालू करने की जी-तोड़ कोशिश की लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया.

रेगिस्तान का वो इलाका इतना क्रूर है कि वहां का तापमान इंसानी जिस्म को सुखा देता है. आस-पास पानी का कोई नामोनिशान नहीं था. देखते ही देखते मुसाफिरों का स्टॉक किया हुआ पानी खत्म हो गया और वे भूख-प्यास से तड़पने लगे.

सिर्फ दो लोग बचे जिंदा

जब मौत बिल्कुल सामने नाचने लगी तो ग्रुप के दो जांबाज लोगों ने आखिरी दांव खेला. वे दोनों झुलसा देने वाली गर्मी में करीब 50 किलोमीटर तक पैदल चलते रहे. किस्मत से उन्हें आगे जाकर पानी का एक स्रोत मिला और फिर वे किसी तरह असमका पहुंचे, जहां उन्होंने तुरंत सरकारी अधिकारियों को इस खौफनाक मंजर की जानकारी दी.

जब तक प्रशासन की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचती, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. थकावट और प्यास के कारण 49 लोगों की सांसें थम चुकी थीं. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, राहत टीम को उस ठहरे हुए ट्रक के नीचे और उसके आस-पास दर्जनों बेजान लाशें बिखरी हुई मिलीं, जो धूप से बचने की नाकाम कोशिश कर रहे थे. हालात इतने खराब थे कि रेस्क्यू टीम को सभी पीड़ितों के शवों को वहीं रेगिस्तान में ही सामूहिक कब्रें खोदकर दफनाना पड़ा.

इन 60 लोगों की किस्मत से बच गई जान
इस भयावह मंजर को देखकर जब रेस्क्यू टीम वापस लौट रही थी, तभी समंदर जैसी रेत के बीच उन्हें एक और चमत्कारिक वाकया देखने को मिला. टीम को रास्ते में एक और बड़ा ट्रक खराब हालत में मिला, जिसमें 60 से ज्यादा लोग सवार थे.

ये लोग भी बैटरी खराब होने की वजह से पिछले तीन दिनों से उसी जानलेवा रेगिस्तान में फंसे हुए थे और पूरी तरह ढह चुके थे. अगर रेस्क्यू टीम वहां सही वक्त पर नहीं पहुंचती तो शायद यहां भी एक और बड़ा सामूहिक नरसंहार जैसा मंजर देखने को मिलता. टीम ने तुरंत इन बेहद थके और बदहवास मुसाफिरों को पानी बांटा, उनकी गाड़ी की बैटरी ठीक की और उन्हें सुरक्षित आगे के सफर के लिए रवाना किया.

इस इलाके में क्यों जाते हैं लोग?
दरअसल, नाइजर का यह रेगिस्तानी इलाका अफ्रीकी देशों के उन प्रवासियों के लिए एक जाना-माना ट्रांजिट पॉइंट है, जो किसी भी तरह यूरोप पहुंचने का सपना देखते हैं. इससे पहले भी हजारों बेगुनाह लोग इन तपती हुई रेतों के बीच प्यास और भूख से तड़पकर अपनी जान गंवा चुके हैं.

 

 

 

 

दो प्यार, दो प्रेग्नेंसी और एक वरुण धवन! पढ़िए

मुंबई। Movie Review: बॉलीवुड में जब भी डबल रोल, लव ट्रायंगल, गलतफहमी और बेतहाशा कॉमेडी की बात होती है तो सबसे पहले नाम आता है डेविड धवन का। ‘बीवी नंबर 1’, ‘घरवाली बाहरवाली’, ‘हीरो नंबर 1’ और ‘जुड़वा’ जैसी फिल्मों से दर्शकों को लोटपोट करने वाले डेविड धवन करीब छह साल बाद निर्देशन में लौटे हैं। इस बार उन्होंने अपने बेटे वरुण धवन के साथ रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ पेश की है, जिसे उनके निर्देशन करियर की आखिरी फिल्म भी बताया जा रहा है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह फिल्म डेविड धवन के सुनहरे दौर की याद दिलाती है या फिर पुराने फॉर्मूले की थकी हुई पुनरावृत्ति बनकर रह जाती है?

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कहानी: एक पति, दो रिश्ते और डबल मुसीबत

फिल्म की कहानी जस (वरुण धवन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) के साथ परिवार बसाने का सपना देखता है। लेकिन बानी अपने करियर को प्राथमिकता देती है। दोनों के रिश्ते में दरार आती है और मामला तलाक तक पहुंच जाता है।

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तलाक से पहले मिले छह महीने के सेपरेशन पीरियड में जस की जिंदगी में प्रीत (पूजा हेगड़े) की एंट्री होती है। जस को लगता है कि अब उसे नया प्यार मिल गया है। लेकिन कहानी में असली धमाका तब होता है जब उसे पता चलता है कि बानी और प्रीत दोनों ही उसके बच्चे की मां बनने वाली हैं।

इसके बाद शुरू होती है रिश्तों, झूठ, गलतफहमियों और हास्यास्पद परिस्थितियों की ऐसी भसड़, जो फिल्म को आगे बढ़ाती है।

डायरेक्शन: पुरानी शराब, नई बोतल

डेविड धवन ने इस फिल्म में वही पुराना मसाला डालने की कोशिश की है जिसने उन्हें कभी कॉमेडी का बादशाह बनाया था। लेकिन समय बदल चुका है। आज का दर्शक कंटेंट, लेखन और नएपन की मांग करता है।

फिल्म कई जगह ‘बीवी नंबर 1’ और ‘घरवाली बाहरवाली’ की याद दिलाती है, लेकिन वैसा मनोरंजन पैदा नहीं कर पाती। कहानी काफी हद तक अनुमानित हो जाती है और कई कॉमिक सिचुएशन जबरदस्ती खींची हुई लगती हैं। कई समीक्षकों ने भी माना कि फिल्म जरूरत से ज्यादा शोर और स्लैपस्टिक कॉमेडी पर निर्भर करती है।

एक्टिंग: वरुण ने बचाने की पूरी कोशिश की

Varun Dhawan

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत वरुण धवन हैं। उनकी एनर्जी, एक्सप्रेशन और कॉमिक टाइमिंग कई कमजोर दृश्यों को संभालने की कोशिश करती है। हालांकि दर्शक उन्हें इस अंदाज में पहले भी कई बार देख चुके हैं।

Mrunal Thakur

मृणाल ठाकुर ने अपने किरदार को ईमानदारी से निभाया है। भावनात्मक दृश्यों में वह प्रभाव छोड़ती हैं।

Pooja Hegde

पूजा हेगड़े स्क्रीन पर आकर्षक लगती हैं और उनका काम भी ठीक-ठाक है, लेकिन किरदार को गहराई नहीं मिलती।

सपोर्टिंग कास्ट

Maniesh Paul फिल्म के सरप्राइज पैकेज साबित होते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी खूब तारीफ हो रही है।

वहीं Jimmy Sheirgill, Mouni Roy, Chunky Panday, Rakesh Bedi, Rajpal Yadav और Johnny Lever अपने छोटे-छोटे दृश्यों में मुस्कान जरूर छोड़ जाते हैं।

संगीत कैसा है?

फिल्म का संगीत इसकी सकारात्मक बातों में शामिल है। टाइटल ट्रैक, “चुनरी चुनी” और “वॉव” जैसे गाने दर्शकों को पसंद आ रहे हैं। संगीत में वही हल्का-फुल्का बॉलीवुड फ्लेवर है जो फिल्म के मूड से मेल खाता है।

फिल्म की लागत और बॉक्स ऑफिस

फिल्म के निर्माताओं ने आधिकारिक बजट सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका बजट करीब 90 से 100 करोड़ रुपये के बीच माना जा रहा है।

रिलीज के पहले दिन फिल्म के कलेक्शन को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। कुछ ट्रेड रिपोर्ट्स में पहले दिन लगभग 11 करोड़ रुपये की ओपनिंग बताई गई है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स इसे सिंगल डिजिट ओपनिंग मान रही हैं। हालांकि इतना तय है कि फिल्म ने शुरुआती दिन में चर्चा जरूर बटोरी है।

सोशल मीडिया पर क्या कह रहे हैं लोग?

एक तरफ दर्शकों का एक वर्ग फिल्म को “पैसा वसूल फैमिली एंटरटेनर” बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे पुरानी और आउटडेटेड कॉमेडी कह रहे हैं। कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

अंतिम फैसला

‘है जवानी तो इश्क होना है’ एक ऐसी फिल्म है जो 90 के दशक की डेविड धवन शैली को फिर से जिंदा करने की कोशिश करती है। अगर आप लॉजिक से ज्यादा हल्की-फुल्की कॉमेडी, रंग-बिरंगे गाने और वरुण धवन की एनर्जी पसंद करते हैं तो फिल्म आपको कुछ हद तक मनोरंजन दे सकती है।

लेकिन अगर आप नई सोच, मजबूत कहानी और आधुनिक कॉमेडी की उम्मीद लेकर थिएटर जा रहे हैं तो यह फिल्म आपको निराश भी कर सकती है।

देखें या नहीं?
अगर आप डेविड धवन और वरुण धवन की जोड़ी के फैन हैं तो एक बार थिएटर में देख सकते हैं। बाकी दर्शकों के लिए OTT रिलीज का इंतजार बेहतर विकल्प हो सकता है।

सिर्फ 7 करोड़ में बनी ‘Obsession’ ने दुनिया

MOVIE REVIEW: हॉलीवुड में हर साल कई हॉरर फिल्में रिलीज होती हैं, लेकिन 2026 में आई फिल्म ‘Obsession’ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बेहद कम बजट में बनी इस मनोवैज्ञानिक हॉरर थ्रिलर ने बॉक्स ऑफिस पर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर रिकॉर्ड बना दिया है। खास बात यह है कि फिल्म में न कोई बड़ा सुपरस्टार है और न ही भारी-भरकम VFX का इस्तेमाल किया गया है, इसके बावजूद यह साल की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली फिल्मों में शामिल हो चुकी है। सोशल मीडिया पर लगातार लोग पूछ रहे हैं कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है जिसने इसे वैश्विक स्तर पर “ऑब्सेशन” बना दिया।

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फिल्म को युवा फिल्ममेकर Curry Barker ने लिखा, निर्देशित और एडिट किया है। महज 26 साल की उम्र में उन्होंने ऐसा हॉरर अनुभव तैयार किया है जिसकी तुलना The Blair Witch Project और Paranormal Activity जैसी कल्ट फिल्मों से की जा रही है। इससे पहले Curry Barker यूट्यूब कंटेंट क्रिएटर के तौर पर पहचाने जाते थे, लेकिन ‘Obsession’ ने उन्हें हॉलीवुड में नई पहचान दिला दी है।

फिल्म की कहानी Bear नाम के युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार Michael Johnston ने निभाया है। Bear अपनी बचपन की दोस्त Nikki से प्यार करता है, लेकिन कभी अपने दिल की बात नहीं कह पाता। कहानी में मोड़ तब आता है जब उसे एक रहस्यमयी वस्तु “One Wish Willow” मिलती है, जो एक इच्छा पूरी कर सकती है। Bear इच्छा मांगता है कि Nikki उसे दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार करे। शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगता है, लेकिन धीरे-धीरे Nikki का प्यार खतरनाक जुनून में बदलने लगता है। वह Bear को किसी और के साथ देखना बर्दाश्त नहीं कर पाती और उसकी हरकतें डरावनी और हिंसक होती चली जाती हैं। यहीं से फिल्म का असली खौफ शुरू होता है।

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‘Obsession’ की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जा रही है कि यह पारंपरिक हॉरर फिल्मों की तरह सिर्फ भूत-प्रेत या जंप स्केयर के जरिए नहीं डराती। फिल्म सामान्य दिखने वाली स्थितियों को धीरे-धीरे इतना असहज बना देती है कि दर्शक लगातार तनाव महसूस करते रहते हैं। Nikki की मौजूदगी, उसकी मुस्कान, आवाज और शांत व्यवहार धीरे-धीरे डर का रूप ले लेते हैं। कई दृश्य ऐसे हैं जहां स्क्रीन पर कुछ खास नहीं हो रहा होता, फिर भी दर्शकों के भीतर बेचैनी बनी रहती है।

फिल्म में Michael Johnston ने Bear के किरदार को मजबूती से निभाया है, लेकिन सबसे ज्यादा तारीफ Inde Navarrette की हो रही है। समीक्षक उनके प्रदर्शन को 2026 की सबसे यादगार हॉरर परफॉर्मेंस में से एक बता रहे हैं। उन्होंने प्यार, जुनून, दर्द और मानसिक अस्थिरता को बेहद प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है।

बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों ने भी फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म का बजट केवल 7.5 लाख से 10 लाख डॉलर यानी करीब 6 से 8 करोड़ रुपये था, जबकि रिलीज के कुछ ही हफ्तों में इसने दुनिया भर में 150 मिलियन डॉलर यानी करीब 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली। इसी के साथ ‘Obsession’ 2026 की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में शामिल हो गई है।

सोशल मीडिया पर फिल्म कई वजहों से लगातार ट्रेंड कर रही है। कम बजट में बड़ी सफलता, डर पैदा करने का नया तरीका, Gen-Z दर्शकों के बीच लोकप्रियता और रिश्तों व सोशल मीडिया पर फिल्म का व्यंग्य लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है। वहीं निर्देशक Curry Barker ने फिल्म में सस्ते जंप स्केयर के बजाय सन्नाटा, अंधेरा, कैमरा एंगल और साउंड डिजाइन का प्रभावी इस्तेमाल किया है, जिसने फिल्म को अलग स्तर पर पहुंचा दिया।

कुल मिलाकर ‘Obsession’ सिर्फ एक हॉरर फिल्म नहीं, बल्कि प्यार और जुनून के खतरनाक अंतर को दिखाने वाली डार्क कहानी है। यह फिल्म सवाल उठाती है कि क्या इंसान सच में प्यार चाहता है या सिर्फ किसी का अंधा समर्पण। अगर आपको Smile, Talk To Me या Hereditary जैसी मनोवैज्ञानिक हॉरर फिल्में पसंद हैं, तो ‘Obsession’ 2026 की ऐसी फिल्म मानी जा रही है जिसे मिस नहीं करना चाहिए।

रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐½ (4.5/5)

मीडिया ट्रायल और सिस्टम के शिकंजे

ENTRETENMENT: आज के डिजिटल दौर में डेटिंग ऐप्स पर रिश्ते बनाना जितना आसान हो गया है, उतना ही खतरनाक भी। एक साधारण-सी बातचीत कब जुनून, बदले और बर्बादी की कहानी बन जाए, कोई नहीं जानता। निर्देशक Anurag Kashyap की नई नियो-नॉयर क्राइम थ्रिलर Bandar इसी खौफनाक हकीकत को बड़े पर्दे पर उतारती है। फिल्म की कहानी समीर मेहरा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार Bobby Deol ने निभाया है। समीर एक ढलते करियर वाला कलाकार है, जिसकी जिंदगी तब तबाह हो जाती है जब उसकी पूर्व प्रेमिका उस पर गंभीर आरोप लगा देती है। गिरफ्तारी, मीडिया ट्रायल, पुलिस पूछताछ और न्याय व्यवस्था के बीच वह खुद को साबित करने की जंग लड़ता है।

अनुराग कश्यप की वापसी

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कई वर्षों बाद अनुराग कश्यप अपने उस अंदाज में नजर आते हैं, जिसने कभी गैंग्स ऑफ वासेपुर और रमन राघव 2.0 जैसी फिल्में दी थीं। फिल्म का माहौल अंधेरा, बेचैन करने वाला और लगातार तनाव पैदा करने वाला है। कहानी धीरे-धीरे खुलती है और दर्शक को अंत तक बांधे रखती है। सोशल मीडिया ट्रायल, झूठ-सच की लड़ाई और न्याय व्यवस्था की खामियों पर फिल्म तीखा सवाल उठाती है।

बॉबी देओल का करियर-बेस्ट प्रदर्शन?

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अगर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत किसी को कहा जाए तो वह बॉबी देओल हैं। उन्होंने समीर के डर, टूटन, गुस्से और बेबसी को बेहद नियंत्रित और प्रभावशाली तरीके से निभाया है। कई शुरुआती समीक्षाओं में इसे उनके करियर की सबसे परिपक्व और भावनात्मक परफॉर्मेंस बताया गया है।

बाकी कलाकार भी शानदार

Sanya Malhotra अपने सीमित लेकिन प्रभावी किरदार में प्रभावित करती हैं। Sapna Pabbi कहानी के सबसे रहस्यमयी हिस्से को मजबूती देती हैं, जबकि Saba Azad, Indrajith Sukumaran, Raj B Shetty और Jitendra Joshi कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं।

संगीत और तकनीकी पक्ष

फिल्म की सिनेमैटोग्राफी कहानी के अंधेरे और घुटन भरे माहौल को बेहतरीन तरीके से कैद करती है। बैकग्राउंड स्कोर तनाव को लगातार बनाए रखता है और कई दृश्यों में संवादों से ज्यादा असर पैदा करता है। एडिटिंग भी कसी हुई है, हालांकि दूसरे हाफ में कुछ हिस्से थोड़े लंबे महसूस हो सकते हैं।

अगर आपको मसाला मनोरंजन, बड़े-बड़े हीरोइक मोमेंट्स और हल्की-फुल्की फिल्में पसंद हैं तो बंदर आपके लिए नहीं है। लेकिन अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो आपको सोचने पर मजबूर करें, समाज के असहज सवालों को सामने रखें और अंत तक सस्पेंस बनाए रखें, तो यह फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए।

‘बंदर’ सिर्फ एक क्राइम थ्रिलर नहीं है, बल्कि आरोप, मीडिया ट्रायल, डिजिटल रिश्तों और न्याय व्यवस्था के बीच पिसते एक इंसान की दर्दनाक कहानी है। अनुराग कश्यप ने एक बार फिर साबित किया है कि जब वे अपने रंग में होते हैं, तो हिंदी सिनेमा को सबसे अलग और बेचैन कर देने वाली कहानियां देते हैं। बॉबी देओल इस फिल्म की आत्मा हैं और उनकी परफॉर्मेंस लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

वन लाइनर:
“एक आरोप, एक जिंदगी और सच तक पहुंचने की खतरनाक सुरंग — यही है ‘बंदर’।”

सूर्यकुमार यादव की जगह श्रेयस अय्यर होंगे अगले टी20 कप्तान, 6 जून को होगा टीम इंडिया का ऐलान

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डेस्क। श्रेयस अय्यर का भारत का अगला टी20 कप्तान बनना तय है. वह सूर्यकुमार यादव को रिप्लेस करेंगे. हालांकि एपेक्स काउंसिल की ऑनलाइन मीटिंग में टी20 कप्तानी के मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर चर्चा नहीं हुई.

लेकिन, शीर्ष पदाधिकारियों को श्रेयस अय्यर को कप्तान नियुक्त करने की इच्छा के बारे में सूचित कर दिया गया है. संभवतः 6 जून को कप्तान के चयन के लिए होने वाली बैठक में श्रेयस से परामर्श लिया जाएगा.

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तिलक वर्मा बनेंगे उपकप्तान

साथ ही तिलक वर्मा को उपकप्तान बनाए जाने की भी बात हुई है. श्रेयस को कप्तान बनाने के साथ-साथ बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारी तिलक को उपकप्तान बनाने के लिए भी तैयार हो गए हैं. श्रेयस को कप्तान और तिलक को उपकप्तान बनाने का फैसला सिलेक्टर्स और कोच की सर्वसम्मति से लिया गया है.

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6 जून को होगा टीम इंडिया का ऐलान

06 जून को आयरलैंड दौरे पर होने वाली टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का एलान किया जाएगा, जिसमें अय्यर को कप्तान बनने का आधिकारिक एलान हो जाएगा.

350 करोड़ की ‘पेद्दी’ में राम चरण का तूफान

MOVIE REVIEW: दक्षिण भारतीय सिनेमा जब भी किसी बड़े कैनवास पर गांव, संघर्ष और खेल को साथ लेकर आता है तो उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। ‘उप्पेना’ जैसी सफल फिल्म देने वाले निर्देशक बुच्ची बाबू सना ने इस बार राम चरण के साथ मिलकर ‘पेद्दी’ के रूप में एक ऐसी कहानी पेश की है, जो सिर्फ क्रिकेट की नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई की कहानी है।

करीब 350 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में बनी यह फिल्म राम चरण के करियर की सबसे महत्वाकांक्षी फिल्मों में गिनी जा रही है। इसके लिए अभिनेता ने लगभग दो साल का समय दिया और इसका असर पर्दे पर साफ दिखाई देता है। हालांकि फिल्म जहां अभिनय, तकनीक और भावनात्मक दृश्यों में चमकती है, वहीं इसकी पटकथा कई जगह दर्शकों को निराश भी करती है।

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कहानी: एक गांव की पहचान की लड़ाई

फिल्म की कहानी आंध्र प्रदेश के एक पिछड़े और उपेक्षित गांव से शुरू होती है। यह ऐसा गांव है जिसका नाम सरकारी रिकॉर्ड और देश के नक्शे में तक दर्ज नहीं है। गांव के लोगों के पास पहचान पत्र नहीं हैं, इसलिए वे मतदान भी नहीं कर सकते।

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इसी गांव में रहता है राजू उर्फ पेद्दी (राम चरण), जो निम्न जाति से आने वाला एक मेहनतकश मजदूर है। उसके भीतर अपने गांव को पहचान दिलाने और सम्मानजनक जीवन दिलाने की जिद है।

गांव के बुजुर्ग अप्पलासूरी (जगपति बाबू) पिछले 30 वर्षों से रेलवे अधिकारियों से सिर्फ इतनी मांग कर रहे हैं कि उनके गांव में एक मिनट के लिए ट्रेन रुक जाए, ताकि दुनिया को पता चल सके कि यह गांव भी अस्तित्व में है। लेकिन व्यवस्था की बेरुखी और जातिगत भेदभाव के कारण उनकी हर कोशिश नाकाम होती रही है।

कहानी तब नया मोड़ लेती है जब क्रिकेट गांव के संघर्ष का हथियार बन जाता है। पेद्दी और उसके साथी खेल के मैदान में उतरकर अपने गांव को पहचान दिलाने की लड़ाई शुरू करते हैं। यहीं से फिल्म भावनात्मक और प्रेरणादायक मोड़ लेती है।

राम चरण: करियर की सबसे दमदार परफॉर्मेंस

अगर ‘पेद्दी’ देखने की सबसे बड़ी वजह कोई है तो वह राम चरण हैं।

उन्होंने सिर्फ अभिनय नहीं किया बल्कि किरदार को जिया है। गांव के मजदूर की शारीरिक भाषा, चेहरे की कठोरता, भावनात्मक दृश्यों में दर्द और मैदान पर खिलाड़ी का जुनून—हर पहलू में राम चरण प्रभाव छोड़ते हैं।

कई दृश्यों में उनकी आंखें संवादों से ज्यादा बोलती हैं। खासकर गांव के अपमान और संघर्ष वाले सीक्वेंस दर्शकों को भावुक कर देते हैं। यह निस्संदेह उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों में से एक मानी जाएगी।

निर्देशन: बुच्ची बाबू का विजन शानदार

निर्देशक बुच्ची बाबू सना का विजन बेहद बड़ा और महत्वाकांक्षी है। उन्होंने गांव की गरीबी, जातिगत भेदभाव और खेल के जुनून को बड़े पैमाने पर पर्दे पर उतारा है।

फिल्म के कई दृश्य सिनेमाई तौर पर बेहद प्रभावशाली हैं। विशेष रूप से क्रिकेट मैचों के सीक्वेंस और गांव के संघर्ष वाले दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं।

हालांकि समस्या तब आती है जब फिल्म दूसरे हाफ में जरूरत से ज्यादा लंबी और भावुक होने लगती है। कुछ हिस्से दोहराव का शिकार भी दिखाई देते हैं।

लेखन और पटकथा: सबसे कमजोर कड़ी

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी पटकथा है।

जिस कहानी में भावनात्मक विस्फोट और सामाजिक संघर्ष की अपार संभावनाएं थीं, उसे पूरी मजबूती से विकसित नहीं किया गया। कई महत्वपूर्ण किरदार अधूरे लगते हैं और कुछ घटनाएं जल्दबाजी में आगे बढ़ती हैं।

दूसरे हाफ में फिल्म का प्रभाव बार-बार टूटता है। जहां दर्शक एक मजबूत क्लाइमेक्स की उम्मीद करते हैं, वहां पटकथा उतनी धार नहीं दिखा पाती।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर

फिल्म का संगीत इसकी सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है।

लोक संगीत और भावनात्मक धुनों का मिश्रण कहानी को मजबूती देता है। बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान करता है। क्रिकेट मैचों और संघर्ष वाले सीक्वेंस में संगीत रोमांच को कई गुना बढ़ा देता है।

हालांकि सभी गाने यादगार नहीं बन पाते, लेकिन बैकग्राउंड म्यूजिक दर्शकों पर गहरा असर छोड़ता है।

तकनीकी पक्ष

सिनेमैटोग्राफी फिल्म का शानदार पहलू है। गांव की धूलभरी गलियों, खेतों और मैदानों को बेहद खूबसूरती से फिल्माया गया है।

प्रोडक्शन डिजाइन और सेट्स पर भारी बजट का असर साफ दिखाई देता है। विजुअल क्वालिटी किसी भी स्तर पर समझौता करती नजर नहीं आती।

एडिटिंग थोड़ी और कसावट मांगती थी, खासकर दूसरे हाफ में।

सह कलाकारों का काम

जगपति बाबू अपने किरदार में प्रभावशाली हैं। गांव के बुजुर्ग और संघर्षशील व्यक्ति के रूप में उनका अभिनय फिल्म को भावनात्मक गहराई देता है।

अन्य कलाकारों ने भी अपने किरदारों के साथ न्याय किया है, हालांकि अधिकांश फोकस राम चरण पर ही केंद्रित रहता है।

क्या फिल्म देखने लायक है?

अगर आप दमदार अभिनय, बड़े पैमाने का सिनेमा और भावनात्मक स्पोर्ट्स ड्रामा पसंद करते हैं तो ‘पेद्दी’ आपको जरूर पसंद आएगी।

लेकिन अगर आप बेहद कसावट वाली पटकथा और पूरी तरह संतुलित कहानी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो कुछ निराशा हाथ लग सकती है।

अंतिम फैसला

‘पेद्दी’ एक ऐसी फिल्म है जो दिल जीतती है, लेकिन पूरी तरह दिमाग पर कब्जा नहीं कर पाती। राम चरण की शानदार अदाकारी, भव्य निर्माण और मजबूत भावनात्मक दृश्यों के बावजूद कमजोर लेखन इसे महान फिल्म बनने से रोक देता है।

फिर भी बड़े पर्दे पर देखने लायक यह एक प्रभावशाली अनुभव है, जो संघर्ष, पहचान और सपनों की कहानी को भव्यता के साथ पेश करती है।

फाइनल रेटिंग: ⭐⭐⭐½ (3.5/5)

क्या अच्छा है: राम चरण का अभिनय, विजुअल्स, बैकग्राउंड स्कोर, भावनात्मक दृश्य।

क्या कमजोर है: पटकथा, लंबा दूसरा हाफ और कुछ अधूरे किरदार।

वन लाइनर: “राम चरण चमके, लेकिन कहानी उतनी ऊंची उड़ान नहीं भर पाई जितनी ‘पेद्दी’ से उम्मीद थी।”

टीवी एक्टरेस एकता कपूर अब ज्वेलरी

मनोरंजन। Entertainment: मनोरंजन भारत के सबसे बड़े एंटरटेनमेंट एम्पायर में से एक बनाने के बाद टेलीविज़न और फिल्म प्रोड्यूसर एकता कपूर अब अपने एंटरप्रेन्योरियल सफर को एक नए क्षेत्र में आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने अब लग्ज़री ज्वेलरी इंडस्ट्री में कदम रखा है और ‘एकत्रा ज्वेल्स’ में को-फाउंडर के तौर पर शामिल हो गई हैं। इस कदम के साथ वह लग्ज़री लाइफस्टाइल और डिजाइन की दुनिया में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं।

इस नए ब्रांड का उद्देश्य आधुनिक उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ज्वेलरी डिजाइन में नवाचार लाना है। ब्रांड का फोकस नए डिजाइन, बेहतर कारीगरी और लग्ज़री के बदलते अर्थ को परिभाषित करने पर है, जो आज की लाइफस्टाइल और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के साथ मेल खाता हो। ‘एकत्रा ज्वेल्स’ को एक ऐसा प्लेटफॉर्म बताया जा रहा है, जहां परंपरागत ज्वेलरी डिजाइन और आधुनिक सोच का मिश्रण देखने को मिलेगा। इस ब्रांड के जरिए ग्राहकों को ऐसे उत्पाद उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, जो न केवल फैशन को दर्शाते हों, बल्कि पहचान, आत्मविश्वास और आधुनिक स्त्रीत्व की भावना को भी उजागर करें

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इस वेंचर में एकता कपूर के साथ इंटीरियर डिजाइनर और एंटरप्रेन्योर सुज़ैन खान भी जुड़ी हुई हैं। दोनों ने मिलकर इस ब्रांड की स्थापना की है, जो उनके लंबे समय से चले आ रहे व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों पर आधारित है। बताया जा रहा है कि यह साझेदारी क्रिएटिविटी और डिजाइन के नए आयामों को सामने लाने पर केंद्रित है। कंपनी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यह ब्रांड लग्ज़री ज्वेलरी सेगमेंट में एक नई पहचान बनाने की कोशिश करेगा और भारतीय बाजार के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की योजना रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बाद अब एकता कपूर का यह कदम उनके बिजनेस पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगा। वहीं, लग्ज़री ज्वेलरी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह नया ब्रांड अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश करेगा।