Friday, August 7, 2026
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5.68 मिलियन फॉलोअर्स वाला यूट्यूबर निकला गांजा

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महासमुंद। CG NEWS : छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए सोशल मीडिया स्टार और यूट्यूबर आकाश जाधव को गांजा तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया है। 7 से 29 जनवरी के बीच पुलिस ने 8 अलग-अलग मामलों में करीब 7.86 करोड़ रुपए का गांजा और नशीली सिरप जब्त की है। इस दौरान 27 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, महाराष्ट्र निवासी 35 वर्षीय आकाश जाधव ओडिशा से महाराष्ट्र तक गांजा परिवहन का पूरा नेटवर्क संभाल रहा था। यूट्यूब पर उसके 5.68 मिलियन सब्सक्राइबर और इंस्टाग्राम पर 3.17 लाख फॉलोअर्स हैं। वह सांप रेस्क्यू के वीडियो बनाकर लोकप्रिय हुआ, लेकिन इसी आड़ में नशे का अवैध कारोबार चला रहा था।

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एम्बुलेंस और लग्जरी कार से होती थी तस्करी

पुलिस जांच में सामने आया है कि आकाश जाधव गांजा तस्करी के लिए एम्बुलेंस, कार और अन्य वाहनों का इस्तेमाल करता था। हाल ही में एम्बुलेंस से पकड़ी गई गांजे की बड़ी खेप भी उसी नेटवर्क से जुड़ी थी। आकाश पिछले छह महीनों से पुणे के एक मामले में फरार था।

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पुलिस ने उसकी फॉर्च्यूनर कार समेत करीब 1.5 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की है।

कोमाखान थाना क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी

कोमाखान थाना क्षेत्र में पुलिस ने 950 किलो गांजा जब्त किया, जिसकी कीमत करीब 4.75 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस मामले में महाराष्ट्र के जालना जिले के परिवहनकर्ताओं के साथ मुख्य व्यवस्थापक प्रदीप मुसदवले को गिरफ्तार किया गया।

एक अन्य कार्रवाई में 520 किलो गांजा (करीब 2.60 करोड़ रुपए) के साथ पुणे के सोनवाने परिवार के रामदास, कुनाल और प्रतीक सोनवाने तथा ओडिशा के सप्लायर रंजन दुर्गा को पकड़ा गया।

ओडिशा से दुर्ग-रायपुर तक फैला नेटवर्क टूटा

सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में अंतरराज्यीय सीमा पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 50 किलो गांजा (25 लाख रुपए) के साथ परिवहनकर्ता कुशल सिंह और उत्तर प्रदेश के खरीदार राघवेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया।

इसके अलावा नशीली सिरप के अवैध कारोबार में 146 सिरप जब्त कर ओडिशा से दुर्ग-रायपुर तक फैले नेटवर्क को तोड़ा गया।

एसपी प्रभात कुमार का बयान

एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के तस्कर शामिल हैं। डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन ट्रैकिंग और ऑनलाइन लेन-देन के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी गई हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।

 

फोन पर बात करने से लकवाग्रस्त पति ने किया मना

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कोरबा। CG NEWS :  छत्तीसगढ़ के कोरबा से रिश्तों को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां गैर व्यक्ति के साथ मोबाइल में बातचीत करने पर लकवाग्रस्त पति ने मना किया, तो पत्नी ने जहरीली दवा पिला कर पति मौत के घाट उतार दिया। घटना को आत्महत्या देने का प्रयास किया, पर बच्चों ने सच्चाई बता दी। महिला ने बच्चों से ही कीटनाशक दवा दुकान से मंगाया था। पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला दर्री थाना क्षेत्र का है।

बेटी ने मां को देखा

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जब पत्नी ने पति के पानी में जहर मिला रही थी, तब बेटी ने मां को पानी में कीटनाशक मिलाते हुए देख लिया था. अपने बड़े भाई को इसकी जानकारी दी. जब बच्चों ने घर में रखी कीटनाशक की शीशी देखी, तो वो पूरी तरह से खाली थी. जहर वाला पानी पीने से जब अरुण की तबीयत बिगड़ने लगी तो पत्नी अस्पताल ले जाने में टालमटोल करती रही. रात भर अरुण की हालत गंभीर बनी रही. अगले दिन अरुण को अस्पताल ले जाया गया, जहां 30 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

बच्चों ने पुलिस को बताई सच्चाई

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बच्चों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने पत्नी को हिरासत में लिया और पूछताछ शुरू की. पुलिस पूछताछ में आरोपी पत्नी ने पति की हत्या करने की बात स्वीकार कर ली. 27 जनवरी सुबह मां ने बेटे से फूलों में छिड़काव के लिए के लिए कीटनाशक मंगाया. बेटे ने कीटनाशक मां को खरीदकर दे दिया. शाम को उसने पहले बेटा-बेटी को कमरे से बाहर निकाल दिया. इसके बाद कीटनाशक को पानी में मिलाकर पति को पिला दिया. पिता को कीटनाशक पिलाते हुए बेटी ने खिड़की से देख लिया था.

अरुण को होने लगी उल्टियां

जब अरुण को होने लगी उल्टियां होने लगी तब बच्चों ने पिता को अस्पताल ले जाने के लिए कहते रहे, लेकिन मां टालमटोल करती रही. रात भर पिता तड़पता रहा. 28 जनवरी को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया. दो दिन इलाज के बाद उसकी मौत हो गई. सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जानकारी ली. जब पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार किया तो शुरुआत में वह गुमराह करती रही. लेकिन बाद में सख्ती से पूछताछ करने पर उसने जुर्म स्वीकार किया. आरोपी पत्नी के खिलाफ हत्या की धारा के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है.

 

CG NEWS : छत्तीसगढ़ में रेल हादसा : अचानक पटरी से उतरकर पलटे मालगाड़ी के दो डब्बे

मात्र इतना सा काम और मिलेगी 8 करोड़ की सैलरी, फिर भी लोग

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डेस्क। दुनिया में कई ऐसी नौकरियाँ हैं, जिन्हें करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। ये काम जितने खतरनाक होते हैं, उतना ही इनका पारिश्रमिक भी चौंकाने वाला होता है। ऐसी ही एक बेहद जोखिम भरी नौकरी है लाइटहाउस की देखरेख (Lighthouse Keeper)। बाहर से यह काम शांत और आसान लग सकता है, लेकिन इसकी हकीकत बिल्कुल अलग है। समुद्र के बीचों-बीच, चारों तरफ तेज हवाएं, ऊंची लहरें और खतरनाक मौसम—यही इस नौकरी की रोज़मर्रा की सच्चाई है। इसी वजह से इसे दुनिया की सबसे खतरनाक नौकरियों में गिना जाता है।

सैलरी जानकर रह जाएंगे हैरान

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लाइटहाउस की रखवाली को अत्यंत जोखिम भरा काम माना जाता है, इसलिए इसकी सैलरी भी असाधारण होती है। कुछ देशों में इस नौकरी के लिए सालाना वेतन ₹8 करोड़ रुपये तक दिया जाता है। इतनी मोटी रकम का कारण साफ है—यह काम न सिर्फ खतरों से भरा है, बल्कि हर व्यक्ति इसे करने के लिए तैयार भी नहीं होता। ऊंची सैलरी के पीछे भारी जोखिम और अकेलापन छिपा होता है।

अकेलेपन और खतरे का दूसरा नाम

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इस नौकरी में व्यक्ति को समुद्र के बीच या छोटे से द्वीप पर बने लाइटहाउस में अकेले रहना पड़ता है। यहां सुविधाओं की कमी होती है और मौसम पल-पल बदलता रहता है। तेज हवाएं, ऊंची लहरें और आपात स्थिति में मदद न मिल पाना इस काम को और भी कठिन बना देता है। लंबे समय तक अकेले रहकर जिम्मेदारी निभाना मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

तूफानों के बीच “मौत से सामना”

समुद्र के बीच बने लाइटहाउस की देखभाल खासकर तूफानी मौसम में बेहद जोखिम भरी हो जाती है। उफनती लहरें, खतरनाक हवाएं और अस्थिर मौसम इस नौकरी को “मौत के साथ खेलने” जैसा बना देते हैं। ऐसे हालात में काम करने वाला व्यक्ति भारी मानसिक और शारीरिक दबाव में रहता है।

इतना ज्यादा वेतन क्यों?

इतनी जोखिम भरी नौकरी के लिए ऊंची सैलरी इसलिए दी जाती है ताकि लोग इसे छोड़ने के बारे में न सोचें। सरकारें और संबंधित संस्थाएं ऐसे कठिन कार्यों के लिए लोगों को आकर्षित करने के लिए बड़ा पैकेज ऑफर करती हैं। खतरे जितने बड़े होते हैं, इनाम भी उतना ही बड़ा रखा जाता है।

नौकरी के लिए क्या चाहिए?

लाइटहाउस की नौकरी करने के लिए व्यक्ति का मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत होना बेहद जरूरी है। मोटी सैलरी के पीछे कड़ी ट्रेनिंग और जोखिम भरे हालात में काम करने की क्षमता छिपी होती है। बिना विशेष प्रशिक्षण के यह काम संभव नहीं है।

कहां मिलती है ऐसी नौकरी?

यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में समुद्र के बेहद खतरनाक इलाकों में स्थित लाइटहाउस में यह नौकरी मिलती है। यहां ऊंची लहरें और कठोर मौसम आम बात है, इसलिए इन जगहों पर काम करने वालों को भारी भरकम वेतन दिया जाता है।

कितना बड़ा है जोखिम?

इस नौकरी में जोखिम और इनाम—दोनों ही बड़े हैं। अगर कोई व्यक्ति जोखिम से डरता नहीं और लंबे समय तक अकेले काम करने की क्षमता रखता है, तो यह नौकरी उसके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। लेकिन आराम और सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले लोगों के लिए यह काम नहीं है, यही वजह है कि इसे करने वाले लोग बहुत कम मिलते हैं।

 

Mobile Free Darshan: केदारनाथ में अब नहीं बनेंगी रीलें: मंदिर परिसर होगा मोबाइल-फ्री, नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना

 

महिला सेना पुलिस भर्ती रैली 23

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रायपुर। Women Army Recruitment : भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत सेना भर्ती कार्यालय, जबलपुर (मध्यप्रदेश) द्वारा महिला सेना पुलिस पद के लिए भर्ती रैली का आयोजन किया जा रहा है। यह भर्ती रैली 23 फरवरी 2026 को पुलिस ग्राउंड झिंझरी, कटनी (म.प्र.) में आयोजित होगी, जिसमें छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों की चयनित महिला अभ्यर्थी भाग लेंगी।

कॉमन एंट्रेंस एग्जाम में सफल अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका

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महिला सेना पुलिस भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत भारतीय सेना द्वारा 30 जून 2025 से 10 जुलाई 2025 के बीच ऑनलाइन कॉमन एंट्रेंस एग्जाम (CEE) आयोजित किया गया था। इस परीक्षा में सफल घोषित महिला उम्मीदवारों को ही भर्ती रैली में शारीरिक दक्षता परीक्षण, दस्तावेज सत्यापन एवं अन्य चयन प्रक्रियाओं में सम्मिलित किया जाएगा।

24 फरवरी को होगी चिकित्सकीय जांच

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भर्ती रैली के दौरान शारीरिक दक्षता एवं दस्तावेज सत्यापन में सफल महिला अभ्यर्थियों की चिकित्सकीय जांच 24 फरवरी 2026 को सेना अस्पताल, जबलपुर में कराई जाएगी। चिकित्सकीय रूप से पूर्णतः स्वस्थ पाए जाने पर ही अभ्यर्थियों का अंतिम चयन सुनिश्चित किया जाएगा।

भर्ती रैली में भाग लेने वाली योग्य महिला उम्मीदवारों के प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) भारतीय सेना की आधिकारिक वेबसाइट www.joinindianarmy.nic.in पर जारी कर दिए गए हैं। साथ ही प्रवेश पत्र उम्मीदवारों के पंजीकृत ई-मेल आईडी पर भी भेजे गए हैं।
अभ्यर्थियों को रैली स्थल पर एडमिट कार्ड, सभी मूल शैक्षणिक व पहचान संबंधी दस्तावेज तथा आधार कार्ड से लिंक मोबाइल फोन अनिवार्य रूप से साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रदेश की बेटियों के लिए देश सेवा का सुनहरा अवसर

महिला सेना पुलिस भर्ती रैली छत्तीसगढ़ की युवतियों के लिए अनुशासन, सम्मान और देशसेवा के क्षेत्र में करियर बनाने का एक स्वर्णिम अवसर प्रदान कर रही है। बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की भागीदारी से यह आयोजन राज्य स्तर पर विशेष महत्व रखता है।

 

खदान धंसने से 227 से अधिक लोगों की मौत

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डेस्क। BIG NEWS : अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के पूर्वी हिस्से में स्थित एक खदान में बड़ा हादसा हुआ है, जिसमें 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। देश के हिंसा ग्रस्त प्रांत रुबाया में विद्रोहियों के द्वारा नियुक्त गवर्नर के प्रवक्ता लुबुम्बा कंबेरे मुइसा ने समाचार एजेंसी को ये जानकारी दी है। प्रवक्ता ने बताया कि हादसा बुधवार को एक कोल्टन खदान में हुआ था, जिसमें 200 से ज्यादा लोग शिकार हुए हैं। शुक्रवार शाम तक मरने वालों की सही संख्या के बारे में स्थिति साफ नहीं थी। रुबाया प्रांत दुनिया के लगभग 15% कोल्टन का उत्पादन करता है। यह इलाका साल 2024 से विद्रोही समूह के नियंत्रण में है।

कोल्टन से टैंटलम बनाया जाता है जो गर्मी प्रतिरोधी धातु है। मोबाइल फोन, कम्प्यूटर, एयरोस्पेस कंपोनेंट और गैस टर्बाइन निर्माण में इसकी बहुत ज्यादा मांग है। इन खदानों में स्थानीय लोग हर दिन कुछ डॉलर के लिए हाथ से खुदाई करते है। मुइसा बनाया गया कि जब लोग खदान में काम कर रहे थे, उसी समय जमीन धंस गई। प्रभावित लोगों में खनिक, बच्चे और बाजार की महिलाएं भी थीं। कुछ लोगों को सही समय पर बचा लिया गया और उन्हें गंभीर चोटें आई हैं।

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227 लोगों की हुई मौत

लगभग 20 घायलों का इलाज स्वास्थ्य केंद्रों पर चल रहा है। प्रवक्ता ने हादसे के पीछे बारिश को वजह बताया और कहा कि इसके चलते जमीन कमजोर हो गई है और अचानक धंस गई। गवर्नर के एक सलाहकार ने बताया कि मरने वालों की संख्या कम से कम 227 है। उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। शुक्रवार शाम तक मौतों के बारे में आधिकारिक तौर पर नहीं बताया गया। मौत के आकड़े बढ़ सकते है।

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विद्रोहियों के कंट्रोल में इलाका

साल 2024 से यह खदान विद्रोही समूह AFC/M23 के कंट्रोल में है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि विद्रोही संगठन AFC/M23 ने रुबाया की दौलत को लूटा है और इसका इस्तेमाल किंशासा सरकार के खिलाफ जंग लड़ने में किया है। उनका आरोप है कि इस ऑपरेशन को पड़ोसी रवांडी की सरकार का समर्थन है, जिसे विद्रोही समूह ने खारिज किया है। भारी हथियारों से लैस विद्रोहियों ने पिछले साल तेजी से बढ़ते हुए पूर्वी कांगों में और भी इलाके पर कब्जा कर लिया है।

 

CG POLICE TRANSFER : 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों का तबादला, एसपी ने जारी किया आदेश

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सरगुजा। CG POLICE TRANSFER : जिले में पुलिसकर्मियों का तबादला आदेश जारी किया गया है, जारी आदेश में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी शामिल हुए, जिनमे सहायक उप निरीक्षक, प्रधान आरक्षक और आरक्षक को नई पदस्थापना मिली है।

देखें पूरी लिस्ट

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शनिचरी बाजार में सरेराह युवक की चाकू गोदकर हत्या

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बिलासपुर। CG NEWS : न्यायधानी बिलासपुर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिचरी बाजार स्थित हैप्पी स्ट्रीट रोड पर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब पुरानी रंजिश के चलते एक युवक पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। हमले में गंभीर रूप से घायल युवक की पहचान सानू उर्फ अमन खान के रूप में हुई है, जिसे लहूलुहान हालत में स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।

बताया जा रहा है कि हमलावरों ने सरेराह अमन को घेरकर चाकू से गोद दिया, जिससे मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया। घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस की टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुँची और शव का पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए घेराबंदी की जा रही है, हालांकि वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार होने में कामयाब रहे। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हमलावरों का सुराग लगाया जा सके।

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धान टोकन नहीं कटने से

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जांजगीर-चांपा । CG NEWS: नवागढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कसौंदी में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक गरीब किसान ने धान का टोकन नहीं कटने से परेशान होकर मोबाइल टावर पर चढ़कर आत्महत्या का प्रयास किया।

मामला ग्राम कसौंदी का है, जहां किसान अनिल गड़ेवाल धान खरीदी का टोकन नहीं कटने से काफी दिनों से परेशान था। अपनी समस्या को लेकर वह बार-बार संबंधित विभागों के चक्कर काट रहा था, लेकिन समाधान नहीं मिलने से आहत होकर किसान ने यह कदम उठाया।

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घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए। सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया और तहसीलदार, एसडीएम एवं पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा।

प्रशासनिक अधिकारी एवं पुलिसकर्मी किसान को समझाइश देने में जुटे हुए हैं, ताकि उसे सुरक्षित नीचे उतारा जा सके। वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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ग्रामीणों का कहना है कि धान खरीदी में टोकन कटौती और किसानों की समस्याओं को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समय पर समाधान नहीं होने से किसान मानसिक रूप से टूट रहे हैं।

फिलहाल प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद है और किसान को सुरक्षित बचाने का प्रयास किया जा रहा है। घटना ने एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था और किसानों की परेशानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मरीन ड्राइव पर नए पार्किंग नियम, जनता

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रायपुर | CITY NEWS: राजधानी रायपुर में नगर निगम के एक फैसले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, जहां तेलीबांधा तालाब (मरीन ड्राइव) के पाथवे को पार्किंग स्थल घोषित किए जाने के बाद मॉर्निंग और ईवनिंग वॉक करने वाले लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

नगर निगम ने पाथवे क्षेत्र में पार्किंग शुल्क तय करते हुए चार पहिया वाहनों के लिए 4 घंटे का 20 रुपये और दोपहिया वाहनों के लिए 12 घंटे का 10 रुपये शुल्क निर्धारित किया है, जिसके बाद फुटपाथ को पार्किंग में तब्दील किए जाने का विरोध शुरू हो गया है और तालाब परिसर में विरोधी बैनर भी लगाए गए हैं।

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मॉर्निंग वॉक करने वाले श्यामलाल साहू, विनीत सहित अन्य लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नगर निगम अधिकारियों की यह समझ से परे कार्रवाई है और सवाल उठाया कि क्या अब पैदल चलने वालों से भी शुल्क वसूला जाएगा, जबकि पहले भी इसी तरह का फैसला विरोध के बाद वापस लिया जा चुका है।

हैरानी की बात यह है कि जब इस मुद्दे पर नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप से बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी से ही इनकार कर दिया। गौरतलब है कि जुलाई 2021 में भी नगर निगम ने तेलीबांधा तालाब आने वालों से पार्किंग शुल्क वसूलने का आदेश जारी किया था, लेकिन जनता के विरोध के बाद तत्कालीन महापौर एजाज ढेबर को आदेश वापस लेना पड़ा था, और अब एक बार फिर वही फैसला सामने आने से निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग या देश का सबसे बड़ा

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Mardani 3 Review: रानी मुखर्जी की सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय फ्रैंचाइजी ‘मर्दानी’ एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौटी है। ‘मर्दानी 3’ सिर्फ एक क्राइम फिल्म नहीं बल्कि एक सामाजिक चेतावनी है, जो छोटी बच्चियों पर हो रहे अपराध, मानव तस्करी और सिस्टम की जटिलताओं को सामने लाती है।

पहले दो हिस्सों की तरह इस बार भी फिल्म का स्वर गंभीर, यथार्थवादी और भावनात्मक है। निर्देशक अभिराज मीनावाला ने कहानी को बिना अनावश्यक ग्लैमर या मसाले के पेश किया है, जिससे फिल्म शुरू से ही एक भारी माहौल बनाती है और दर्शक को कहानी से बांधे रखती है।

कहानी

फिल्म में ACP शिवानी रॉय (रानी मुखर्जी) अब NIA के साथ काम कर रही हैं। कहानी की शुरुआत एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस से होती है, जहां एक बड़े अधिकारी की बेटी और उसी घर में काम करने वाली नौकरानी की बेटी अचानक लापता हो जाती हैं। यह मामला देखते ही देखते प्रशासन और पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। इसी बीच देश के अलग-अलग राज्यों से 8 से 12 साल की कुल 93 बच्चियों के गायब होने की रिपोर्ट सामने आती है।

शुरुआत में ये सभी मामले अलग-अलग प्रतीत होते हैं, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, शिवानी को एक बड़े और खतरनाक नेटवर्क का आभास होता है। जल्द ही खुलासा होता है कि इसके पीछे एक संगठित मानव तस्करी गिरोह है, जिसकी मुखिया एक रहस्यमयी और बेहद चालाक बुजुर्ग महिला ‘अम्मा’ है। यह गिरोह बच्चियों को अगवा कर उन्हें गैरकानूनी गतिविधियों में धकेलता है।

जांच के दौरान यह भी सामने आता है कि इस पूरे नेटवर्क का संबंध एक भिखारी गैंग से है, जो मजबूरी और दया का दिखावा करके मेडिकल फील्ड में अवैध कारोबार चलाता है। शिवानी अपनी टीम के साथ लगातार दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप और खतरों के बीच सबूत जुटाती हैं, नेटवर्क की परतें खोलती हैं और बच्चियों को बचाने के लिए एक के बाद एक जोखिम भरे ऑपरेशन को अंजाम देती हैं। फिल्म कई जगह दिल को झकझोरने वाले दृश्य दिखाती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।

अभिनय

ACP शिवानी रॉय के रूप में रानी मुखर्जी एक बार फिर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत साबित होती हैं। उनका अभिनय बेहद सधा हुआ और प्रभावशाली है। जांच का दबाव, गुस्सा, दर्द और जिम्मेदारी—हर भाव को उन्होंने बिना ओवरएक्टिंग के गहराई से निभाया है। यह साफ महसूस होता है कि यह किरदार रानी के करियर के सबसे मजबूत किरदारों में से एक है।

विलेन ‘अम्मा’ के रूप में मल्लिका प्रसाद फिल्म की जान हैं। उनका शांत, ठंडा लेकिन खतरनाक अंदाज दर्शकों के मन में डर पैदा करता है। रानी और मल्लिका के आमने-सामने के दृश्य फिल्म को और ऊंचाई देते हैं। जानकी बोड़ीवाला शिवानी की टीम में एक अहम रोल निभाती हैं और अपने सीमित स्क्रीन टाइम में भी प्रभाव छोड़ती हैं। उनके किरदार में एक हल्की जटिलता है, जो कहानी को और दिलचस्प बनाती है। प्रजेश कश्यप रामानुजन के किरदार में ठोस नजर आते हैं, वहीं बाकी कलाकार भी अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं।

निर्देशन और तकनीकी पक्ष

निर्देशक अभिराज मीनावाला का काम सराहनीय है। उन्होंने कहानी की गंभीरता को बनाए रखा है और फिल्म की रफ्तार को संतुलित रखा है। बैकग्राउंड स्कोर कहानी की टेंशन को बढ़ाता है, कैमरा वर्क यथार्थ के करीब है और एडिटिंग फिल्म को कहीं भी खिंचने नहीं देती। एक्शन सीमित है लेकिन प्रभावी है और दिखावटी नहीं लगता।

कमियां

फिल्म की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसकी कहानी का ढांचा पहले की ‘मर्दानी’ फिल्मों से काफी मिलता-जुलता है। कुछ मोड़ पहले से अनुमानित हो जाते हैं और इंटरवल से पहले का हिस्सा थोड़ा प्रेडिक्टेबल लगता है। कुछ इमोशनल सीन जल्दबाजी में खत्म होते हैं, जहां थोड़ी और गहराई लाई जा सकती थी। सस्पेंस के कुछ हिस्से उम्मीद के मुताबिक चौंकाते नहीं हैं।

देखें या न देखें?

अगर आप रानी मुखर्जी का दमदार और गंभीर अभिनय देखना चाहते हैं, सामाजिक मुद्दों पर आधारित क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं और ऐसी फिल्में देखते हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि सवाल भी खड़े करें, तो ‘मर्दानी 3’ आपके लिए जरूर देखने लायक फिल्म है। यह फिल्म आपको झकझोरती है और सोचने पर मजबूर करती है—और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।