Friday, August 14, 2026
Google search engine
HomeEntertainmentइमरान हाशमी का शिवम पंडित लौटा

इमरान हाशमी का शिवम पंडित लौटा

Aawarapan 2 Movie Review : 19 साल बाद शिवम पंडित की वापसी… और सिनेमाघर में फिर सुनाई दे रही है इमरान हाशमी की वही दर्द भरी आवाज!
आवारापन 2 में प्यार है, दर्द है, बदला है और जबरदस्त एक्शन भी… लेकिन क्या कहानी पहली फिल्म जितनी दिल छू पाती है?

फैंस इमरान हाशमी को देखकर सीटियां बजा रहे हैं, मगर हर दर्शक फिल्म से पूरी तरह खुश नहीं है।

– Advertisement –

Ad image

तो क्या टिकट के पैसे खर्च करने चाहिए? पढ़िए आवारापन 2 का पूरा और बेबाक रिव्यू…

19 साल का इंतजार खत्म

– Advertisement –

Ad image

2007 में रिलीज हुई आवारापन उस समय बॉक्स ऑफिस पर बड़ी कामयाबी नहीं बन पाई थी, लेकिन धीरे-धीरे फिल्म ने ऐसी पहचान बनाई कि वह इमरान हाशमी की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल हो गई। खासकर शिवम पंडित का किरदार और फिल्म का संगीत दर्शकों के दिल में बस गया।

अब करीब 19 साल बाद उसी दुनिया में आवारापन 2 लेकर इमरान हाशमी वापस आए हैं। फिल्म 14 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। इस बार निर्देशन नितिन कक्कड़ ने किया है और इमरान के साथ दिशा पाटनी और शबाना आजमी अहम भूमिकाओं में हैं।

और सबसे दिलचस्प बात—फिल्म के रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इमरान हाशमी ट्रेंड करने लगे।

कहानी कैसी है?

आवारापन 2 का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी कहानी से ज्यादा शिवम पंडित की वापसी है।

फिल्म अपने नायक को फिर उसी अंधेरी दुनिया के बीच खड़ा करती है, जहां अपराध, दर्द, रिश्ते, बदला और भावनाएं एक-दूसरे से टकराते हैं।

लेकिन फिल्म सिर्फ 2007 वाली कहानी को दोहराने की कोशिश नहीं करती। यह शिवम के किरदार को आगे लेकर जाती है और उसके भीतर चल रहे संघर्ष को एक नए एक्शन-ड्रामा के साथ जोड़ती है।

यहीं फिल्म कुछ दर्शकों को पकड़ती है और कुछ को निराश भी करती है।

इमरान हाशमी—फिल्म की सबसे बड़ी ताकत

अगर आवारापन 2 की एक चीज चुननी हो, तो वह है इमरान हाशमी।

शिवम पंडित के किरदार में उनकी वापसी फिल्म को वह वजन देती है, जो शायद किसी दूसरे अभिनेता के साथ नहीं आता।

दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं में भी इमरान की परफॉर्मेंस लगातार सबसे ज्यादा चर्चा में है। कई दर्शकों ने उन्हें फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष बताया है और कहा है कि वह स्क्रीन पर आते ही फिल्म को अपने कब्जे में ले लेते हैं। ⁠

उनका अंदाज अब भी वही है—कम बोलना, चेहरे पर दर्द रखना और जरूरत पड़ने पर हिंसक अवतार में उतर जाना।

यानी 19 साल बाद भी शिवम पंडित के किरदार में इमरान हाशमी की पकड़ कमजोर नहीं हुई है।

लेकिन कहानी में क्या कमी है?

यहीं से फिल्म का दूसरा पहलू सामने आता है।

शुरुआती सोशल मीडिया प्रतिक्रियाएं पूरी तरह एकमत नहीं हैं। जहां कुछ दर्शक फिल्म को इमोशनल और एंटरटेनिंग बता रहे हैं, वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में लेखन और कहानी को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

यानी फिल्म की सबसे बड़ी समस्या यह हो सकती है कि दर्शक इसकी तुलना लगातार पहली आवारापन से करते रहते हैं।

पहली फिल्म का इमोशन काफी सीधा और दिल में उतरने वाला था। आवारापन 2 उस स्तर की भावनात्मक पकड़ हर जगह कायम नहीं रख पाती।

कहीं-कहीं ऐसा महसूस होता है कि फिल्म दर्शकों को कहानी से ज्यादा शिवम पंडित की पुरानी यादों के सहारे बांधे रखना चाहती है।

एक्शन कैसा है?

एक्शन फिल्म का मजबूत पक्ष है।

शुरुआती दर्शक प्रतिक्रियाओं में एक्शन सीक्वेंस और फिल्म के सिनेमैटिक ट्रीटमेंट की तारीफ देखने को मिल रही है।

शिवम का किरदार जब एक्शन मोड में आता है, तो फिल्म की रफ्तार बढ़ जाती है।

लेकिन जो दर्शक आवारापन को मुख्य रूप से उसकी भावनात्मक कहानी और संगीत के लिए याद करते हैं, उन्हें यह सीक्वल कुछ ज्यादा एक्शन-ओरिएंटेड लग सकता है।

संगीत—पुरानी याद बनाम नया अनुभव

आवारापन का संगीत उसकी आत्मा था।

इसलिए दूसरी फिल्म से सबसे ज्यादा उम्मीद संगीत को लेकर ही थी।

आवारापन 2 में संगीत और बैकग्राउंड स्कोर को शुरुआती प्रतिक्रियाओं में अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। कई दर्शकों ने खास तौर पर बैकग्राउंड स्कोर की तारीफ की है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह संगीत पहली फिल्म के “Toh Phir Aao” और “Tera Mera Rishta” वाली भावनात्मक ऊंचाई तक पहुंचता है?

यहीं जवाब थोड़ा कमजोर पड़ता है।

नया संगीत अच्छा है, लेकिन पहली फिल्म का संगीत जिस तरह लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गया था, उस स्तर की तुलना करना मुश्किल है।

दिशा पाटनी कैसी लगीं?

दिशा पाटनी फिल्म में इमरान के साथ नई ऊर्जा लेकर आती हैं।

उनकी मौजूदगी फिल्म को ग्लैमर के साथ-साथ एक अलग भावनात्मक एंगल देती है, लेकिन फिल्म का पूरा भार उनके कंधों पर नहीं है।

यह कहानी मूल रूप से शिवम पंडित और उसके संघर्ष की कहानी है और इसी वजह से इमरान स्पष्ट रूप से फिल्म के केंद्र में बने रहते हैं।

शबाना आजमी का काम

शबाना आजमी जैसी अनुभवी अभिनेत्री का फिल्म में होना अपने आप में एक प्लस पॉइंट है।

उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कहानी को गंभीरता देती है। हालांकि उनका रोल इमरान के किरदार जितना बड़ा नहीं है, लेकिन जहां भी वह दिखाई देती हैं, फिल्म को वजन मिलता है।

सबसे बड़ी परेशानी—पहली फिल्म की छाया

यहां आवारापन 2 की सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है।

अगर फिल्म का नाम आवारापन 2 नहीं होता, तो शायद दर्शक इसे अलग नजर से देखते।

लेकिन दर्शक जब टिकट खरीदकर आते हैं तो उनके दिमाग में 2007 का शिवम पंडित, उसका दर्द, उसका प्यार और वह संगीत पहले से मौजूद होता है।

और यही तुलना सीक्वल के लिए मुश्किल पैदा करती है।

फिल्म अच्छी हो सकती है, लेकिन पहली फिल्म जैसी महसूस होना अलग बात है।

तो क्या फिल्म सिर्फ नॉस्टेल्जिया पर चल रही है?

कुछ हद तक—हां।

और यही फिल्म की ताकत भी है और कमजोरी भी।

इमरान हाशमी को शिवम के रूप में वापस देखना पुराने दर्शकों के लिए बहुत बड़ा भावनात्मक कनेक्शन है। रिलीज के दिन सोशल मीडिया पर इसी नॉस्टेल्जिया की वजह से फिल्म को मजबूत प्रतिक्रिया मिली है।

लेकिन अगर आप पहली फिल्म से कोई जुड़ाव नहीं रखते, तो संभव है कि आपको फिल्म का असर उतना बड़ा महसूस न हो।

दर्शकों का फैसला क्या कह रहा है?

रिलीज के शुरुआती घंटों में तस्वीर मिश्रित लेकिन सकारात्मक तरफ झुकी हुई दिखाई दे रही है।

एक तरफ दर्शक इमरान हाशमी, एक्शन, बैकग्राउंड स्कोर और भावनात्मक हिस्सों की तारीफ कर रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ प्रतिक्रियाएं फिल्म की राइटिंग और उम्मीदों पर खरी न उतरने की शिकायत भी कर रही हैं।

इसलिए इसे अभी “ब्लॉकबस्टर” या “मास्टरपीस” कहना जल्दबाजी होगी।

हालांकि शुरुआती एडवांस बुकिंग काफी मजबूत रही है और फिल्म ने रिलीज से पहले ही अच्छी दिलचस्पी पैदा की थी।

फाइनल फैसला—देखें या नहीं?

अगर आप इमरान हाशमी के फैन हैं—बिल्कुल देखें।

अगर आपने 2007 वाली आवारापन देखी है और शिवम पंडित से भावनात्मक जुड़ाव है, तो यह फिल्म आपके लिए ज्यादा खास रहेगी।

लेकिन अगर आप पहली फिल्म की हूबहू भावनात्मक गहराई, वैसा ही संगीत और वैसी ही कहानी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो उम्मीद थोड़ी कम करके जाएं।

आवारापन 2 कोई परफेक्ट फिल्म नहीं है।

लेकिन यह ऐसी फिल्म भी नहीं है जिसे सीधे खारिज कर दिया जाए।

इमरान हाशमी की दमदार वापसी, एक्शन, नॉस्टेल्जिया और भावनात्मक पल इसे थिएटर में एक बार देखने लायक बनाते हैं—बस पहली फिल्म के जादू से इसकी तुलना करते वक्त उम्मीदों पर थोड़ा कंट्रोल रखना होगा।

⭐ हमारी रेटिंग: 3.5/5

कहानी: ⭐⭐⭐½
इमरान हाशमी: ⭐⭐⭐⭐½
दिशा पाटनी: ⭐⭐⭐
एक्शन: ⭐⭐⭐⭐
संगीत/बैकग्राउंड स्कोर: ⭐⭐⭐½
इमोशन: ⭐⭐⭐½
डायरेक्शन: ⭐⭐⭐½

नॉस्टेल्जिया: ⭐⭐⭐⭐½

एक लाइन में फैसला

“आवारापन 2 दिल जीतने की पूरी कोशिश करती है—शिवम पंडित के रूप में इमरान हाशमी जीत भी जाते हैं, लेकिन फिल्म पहली आवारापन के जादू को पूरी तरह दोहराने में थोड़ी पीछे रह जाती है।”

 

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments