Sunday, May 3, 2026
Google search engine
Home Blog Page 11

CG NEWS: आंगनबाड़ी भर्ती फिर शुरू, यहां देखें पूरी डिटेल, 7 अप्रैल तक आवेदन का मौका

0

गरियाबंद। CG NEWS: कार्यालय परियोजना अधिकारी, एकीकृत बाल विकास परियोजना गरियाबंद के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्रों में रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी जिसे तकनिकी समस्या कारणों से निरस्त कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार निम्न पदों पर तकनिकी सुधार कर पुनः आवेदन आमंत्रित किया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के 01 एवं आंगनबाड़ी सहायिका के 02 पद, इस प्रकार कुल 03 रिक्त पद भरे जाने हैं। जिनमें सेक्टर पीपरछेड़ी के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र भुंजिया पीपरछेड़ी, ग्राम भुंजिया पीपरछेड़ी, ग्राम पंचायत पीपरछेड़ी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का 01 पद रिक्त है।

सेक्टर धवलपुर के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र कुकुरार 01, ग्राम कुकुरार, ग्राम पंचायत आमामोरा में आंगनबाड़ी सहायिका का 01 पद रिक्त है। इसी प्रकार सेक्टर गरियाबंद के अंतर्गत आंगनबाड़ी केंद्र पारागांव में आंगनबाड़ी सहायिका का 01 पद रिक्त है। आवेदन प्रक्रिया ई-भर्ती पोर्टल एडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटई भर्ती डॉट इन के माध्यम से दिनांक 23 मार्च से 7 अप्रैल 2026 तक चालू रहेगी। भर्ती से संबंधित जानकारी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।

The post CG NEWS: आंगनबाड़ी भर्ती फिर शुरू, यहां देखें पूरी डिटेल, 7 अप्रैल तक आवेदन का मौका appeared first on Grand News.

महासमुंद में 47.50 लाख कैश पकड़ाया

0

रवि विदानी, महासमुंद। CG Breaking : बसना थाना क्षेत्र के पालसपाली के पास मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने टोयोटा कार से 32 लाख 50 हजार रुपए की अवैध राशि जब्त की है। इस मामले में आशु बंसल और महेंद्र चौहान को गिरफ्तार किया गया है।

वहीं बलौदा थाना क्षेत्र के सिरपुर इलाके में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 लाख रुपए की अवैध रकम जब्त की है। यहां से केशव अग्रवाल और नरेश अग्रवाल को पकड़ा गया है। चारों आरोपियों के खिलाफ धारा 106 के तहत कार्रवाई करते हुए मामला इनकम टैक्स विभाग को सौंपा जा रहा है। कुल 47 लाख 50 हजार रुपए जब्त किया गया है।

– Advertisement –

गौरतलब है कि महासमुंद जिला पुलिस ने पिछले एक सप्ताह में 1 करोड़ 47 लाख रुपए की अवैध राशि जब्त कर बड़ी सफलता हासिल की है।

 

– Advertisement –

Ad image

 

अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर 0.60

0

रायपुर, 20 मार्च 2026 : Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री चौधरी ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।

– Advertisement –

वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।

– Advertisement –

Ad image

चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।

चौधरी ने बताया कि पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है।

गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।

मंत्री चौधरी ने बताया किसरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।

चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।

वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब योजना संचालित नहीं है तथा रोजगार संबंधी योजनाओं का वित्तपोषण अब राज्य के सामान्य बजट से किया जा रहा है। ऐसे में जिस उद्देश्य से यह उपकर लगाया गया था, वह अब प्रासंगिक नहीं रह गया है। इसी सोच के अनुरूप जनता को राहत प्रदान करने के लिए इस अनावश्यक उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।

मंत्री ने बताया कि वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार को उपकर से लगभग 148 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 150 करोड़ रुपये का उपकर प्राप्त हो चुका है। उपकर समाप्त होने से सरकार को राजस्व की हानि अवश्य होगी, किंतु इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा और यही सरकार की नीतियों का मूल केंद्र है।

उन्होंने आगे कहा कि इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 की धारा 8, धारा 9 तथा अनुसूची में वर्णित उपकर संबंधी प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव किया गया है। अचल संपत्ति के अंतरण विलेखों के पंजीयन पर लगाया जाने वाला उपकर अब पूर्णतः समाप्त कर दिया जाएगा।

शासन के इस निर्णय और पंजीयन विभाग में किए गए सुधारों से प्रदेश की जनता को अनेक प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होंगे। संपत्ति के पंजीयन पर देय शुल्क में कमी आएगी, जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक किफायती होगी, मध्यमवर्गीय एवं निम्न आय वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, दस्तावेजों के पंजीयन में वृद्धि होगी, किसानों और परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा तथा संपत्ति का बाजार मूल्य और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार सदैव इस सिद्धांत पर चली है कि छत्तीसगढ़ की जनता पर अनावश्यक कर का बोझ नहीं होना चाहिए। यह निर्णय और सुधारों की यह श्रृंखला उन लाखों नागरिकों को राहत देने वाली है, जो अपनी जीवन भर की कमाई से जमीन खरीदते हैं, घर बनाते हैं। परिवार में संपत्ति का बंटवारा करते हैं अथवा अपने बच्चों के भविष्य के लिए संपत्ति का हस्तांतरण करते हैं। यह केवल कर में कमी नहीं, बल्कि जनता के परिश्रम, सपनों और अधिकारों के प्रति संवेदनशील शासन का परिचायक है। उन्होंने कहा कि विष्णु देव की सरकार आने के बाद पंजीयन विभाग में किए जाने वाले जनहितैषी सुधारों के कारण पंजीयन शुल्क में होने वाले रियायतों से प्रतिवर्ष 460 करोड़ का सीधा लाभ आमजनता को होगा।

अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर समाप्त, आम नागरिकों को बड़ी राहत – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के माध्यम से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर लगाए गए 0.60 प्रतिशत उपकर को समाप्त करना हमारी सरकार का जनहित में लिया गया एक महत्वपूर्ण निर्णय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि आम नागरिक, किसान और मध्यमवर्गीय परिवारों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। राज्य में सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को केंद्र में रखते हुए हम लगातार कर व्यवस्था को सरल, न्यायसंगत और नागरिक-अनुकूल बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय केवल कर में राहत नहीं, बल्कि उन लाखों परिवारों के सपनों को सम्मान देने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जो अपनी मेहनत की कमाई से घर और जमीन खरीदते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कदम से संपत्ति के पंजीयन में वृद्धि होगी, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

37 बकरे-बकरियों की चोरी के दो शातिर गिरफ्तार

0

CG News : ​बिलासपुर के चकरभाठा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सेवार और ग्राम सारधा में पिछले दिनों हुई पशु चोरी की बड़ी वारदात का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। जानकारी के अनुसार, प्रार्थी की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जब क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो हुलिए के आधार पर दो संदिग्धों, हेमराज उर्फ हेमू (18 वर्ष) और नजीर खान (20 वर्ष), को पकड़कर पूछताछ की गई।

आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर कुल 37 नग बकरे-बकरियों की चोरी की थी, जिनकी कुल कीमत लगभग 77,000 रुपये आंकी गई है। पकड़े गए आरोपियों के पास से चोरी के 4 बकरों को काटकर बेचने से प्राप्त 4,000 रुपये बरामद किए गए हैं। दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

– Advertisement –

छत्तीसगढ़ में जल क्रांति का नया अध्याय

0

CG News : रायपुर। 20 मार्च 2026 : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केन्द्र और राज्य के बीच एमओयू कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल की वर्चुअल मौजूदगी में अधिकारियों ने एमओयू पर हस्ताक्षर कर एक्सचेंज किया।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में यह पहल ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि “हर घर जल” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जल जीवन मिशन 2.0 के तहत हुये एमओयू से इन कार्यों में गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के विस्तारित चरण, जल जीवन मिशन 2.0 को मंजूरी दी है। इस चरण में जल सेवा वितरण प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ जनभागीदारी को भी सुनिश्चित किया जाएगा।

– Advertisement –

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब तक 41 लाख 30 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी लगभग 82.66 प्रतिशत घरों को नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। श्री साय ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत दूरस्थ, वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल पहुंचने से महिलाओं को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें पहले पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि मिशन 2.0 के तहत ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही जल संवर्धन, पुनर्भरण तथा योजनाओं के संचालन और रखरखाव को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि इस एमओयू के माध्यम से पारदर्शी और तकनीक आधारित जल सेवा प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल वितरण और अधिक व्यवस्थित एवं सुदृढ़ होगा।

– Advertisement –

Ad image

मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए केंद्रीय मंत्री से 1300 करोड़ रुपये की विशेष स्वीकृति का आग्रह भी किया। इस स्वीकृति से 70 समूह जल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के 3 हजार से अधिक गांवों तक पेयजल पहुंचाने में मदद मिलेगी। अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री मोदी का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि सभी के सहयोग से छत्तीसगढ़ न केवल “हर घर जल” का लक्ष्य हासिल करेगा, बल्कि सतत जल प्रबंधन और ग्रामीण जल शासन में भी नए मानक स्थापित करेगा।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि आज का दिन अत्यधिक महत्वपूर्ण है और इस एमओयू के बाद छत्तीसगढ़ में पाइप लाइन एवं संरचनाओं के माध्यम से प्रत्येक घर में पानी की पहुँच सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों को इसके तहत सशक्त अधिकार प्राप्त होंगे और इन संरचनाओं के रख रखाव के लिए वे जिम्मेदार होंगे। पाटिल ने कहा कि जिला प्रशासन के जरिये पंचायत के कार्यों पर निगरानी रखी जाएगी एवं आवश्यकता होने पर सहायता भी करेंगे। उन्होंने बताया कि आज का यह एमओयू जल शक्ति मंत्रालय और छत्तीसगढ़ शासन का साझा प्रयास का परिणाम है। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर घर स्वच्छ एवं निर्बाध पानी की पहुँच का सपना साकार होगा।

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश टोप्पो सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

छातीम पेड़ों से मानव स्वास्थ्य को

0

रायपुर। Chhattisgarh Assembly : राजधानी के भाजपा विधायक सुनील सोनी ने आज सदन में छातीम वृक्षों से पड़ने वाले मानव स्वास्थ्य के दुष्प्रभाव का मामला उठाया। उन्होंने अन्य राज्यों में इस पर लगे प्रतिबंध का हवाला देते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की। सरकार की ओर से विभागीय मंत्री ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से जांच के बाद इन वृक्षों पर प्रदेश में प्रतिबंध लगाने का भरोसा सदन को दिलाया है।

प्रश्नकाल के दौरान सत्ता पक्ष के सदस्य सुनील सोनी ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने इसी साल 9 जनवरी को छातीम पेड़ों को हटाने का आदेश जारी कर उसके स्थान पर पीपल, नीम या अन्य पेड़ लगाने का आदेश जारी किया है। छातीम के पेड़ से श्वसन संबंधी गंभीर बीमारी होने की पूरी संभावना रहती है। इसके अलावा यह पेड़ जल श्रोत को भी प्रदूषित कर रहा है। मानव स्वास्थ्य को देखते हुए इन वृक्षों को हटाकर उसकी जगह अन्य पेड़ लगाने क्या सरकार की कोई योजना है।

– Advertisement –

इसके जवाब में आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ पी चौधरी ने कहा कि अन्य राज्य का आदेश देखा है। वन एवं स्वास्थ्य विभाग के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम से चर्चा कर उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर छातीम वृक्षों की जगह अन्य वृक्ष लगाने का निर्णय लेंगे। रिसर्च के बाद जरूरत पड़ने पर इन पेड़ों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी। चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसके लिए सुनील सोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाकर इसका अध्ययन कर अगले सत्र में रिपोर्ट प्रस्तुत कर निर्णय लेने की सलाह विभागीय मंत्री को दी परंतु इसके लिए ओपी चौधरी तैयार नहीं हुए।

CG Breaking : छत्तीसगढ़ में अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़, तरबूज-ककड़ी की आड़ में चल रहा था नशे का खेल

– Advertisement –

Ad image

Chhattisgarh Assembly : प्रदेश में प्रदूषण फैलाने वाले 665 उद्योग संचालित, नेता प्रतिपक्ष के सवालों से घिरे पर्यावरण मंत्री 

 

 

छत्तीसगढ़ में अब यहां अफीम की खेती का भंडाफोड़

0

रायगढ़। CG Breaking : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से नशे के अवैध कारोबार को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। तमनार क्षेत्र के आमाघाट में पुलिस ने दबिश देकर लगभग डेढ़ एकड़ में फैली अफीम की अवैध खेती को नष्ट किया है। इस मामले में पुलिस ने झारखंड के एक आरोपी को हिरासत में लिया है।

तरबूज की आड़ में अफीम का खेल

– Advertisement –

जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने पुलिस और स्थानीय लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए जमीन को तरबूज और ककड़ी की खेती के नाम पर किराए पर लिया था। खेत के बीचों-बीच अफीम की नशीली फसल उगाई जा रही थी, ताकि बाहर से देखने पर किसी को शक न हो।

मुखबिर की सूचना पर रायगढ़ पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आमाघाट में छापेमारी की। पुलिस ने झारखंड निवासी मार्शल सांगां को हिरासत में लिया है। लगभग 1.5 एकड़ में अफीम की फसल लहलहा रही थी।

– Advertisement –

Ad image

15 दिनों में चौथा मामला

छत्तीसगढ़ में पिछले 15 दिनों के भीतर अफीम की खेती का यह चौथा मामला सामने आया है। जिसने पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

Chhattisgarh Assembly : प्रदेश में प्रदूषण फैलाने वाले 665 उद्योग संचालित, नेता प्रतिपक्ष के सवालों से घिरे पर्यावरण मंत्री 

साल में सिर्फ 5 घंटे खुलता है निराई

0

 

गरियाबंद/धमतरी। Chaitra Navratri 2026 : छत्तीसगढ़ की आस्था और रहस्यों से भरी धरती पर स्थित निरई माता मंदिर एक ऐसा अलौकिक धाम है, जहां परंपराएं और मान्यताएं आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। पहाड़ियों के बीच बसा यह मंदिर अपने अनोखे नियमों और चमत्कारों के कारण पूरे प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

– Advertisement –

यह मंदिर गरियाबंद जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर निरई पहाड़ी पर स्थित है। खास बात यह है कि माता का यह दरबार साल में सिर्फ चैत्र नवरात्रि के प्रथम रविवार को ही खुलता है, जानकारी के मुताबिक वो भी मात्र सुबह 4 बजे से 9 बजे तक यानी सिर्फ 5 घंटे के लिए। इस दौरान हजारों श्रद्धालु कठिन रास्तों को पार कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

– Advertisement –

Ad image

बिना तेल के जलती है दिव्य ज्योति

निरई माता मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यहां जलने वाली ज्योति है। मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां स्वतः ज्योति प्रज्ज्वलित होती है, जो बिना तेल के लगातार 9 दिनों तक जलती रहती है। यह चमत्कार आज तक विज्ञान और लोगों के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है, जिसे श्रद्धालु माता की दिव्य शक्ति मानते हैं।

महिलाओं के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध

इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां महिलाओं का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है। सिर्फ पुरुष ही मंदिर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
इतना ही नहीं, महिलाओं के लिए यहां का प्रसाद ग्रहण करना भी मना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर अनहोनी की आशंका रहती है।

अलग है पूजा की परंपरा

जहां अन्य देवी मंदिरों में सिंदूर, कुमकुम और श्रृंगार चढ़ाया जाता है, वहीं निरई माता के दरबार में ये सब नहीं चढ़ाया जाता।
यहां माता को केवल नारियल और अगरबत्ती अर्पित कर पूजा की जाती है, जो इस मंदिर को और भी विशिष्ट बनाता है।

मनोकामना पूरी होने पर दी जाती है बलि

लोक मान्यता के अनुसार, यहां बकरों की बलि देने की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। श्रद्धालु मानते हैं कि माता के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने और मनोकामना पूरी होने पर बलि अर्पित करने से उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

नियम तोड़ने पर मिलता है दंड

ग्रामीणों का कहना है कि माता के दरबार में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। अगर कोई व्यक्ति शराब सेवन या गलत आचरण के साथ मंदिर में प्रवेश करता है, तो उसे माता के क्रोध का सामना करना पड़ता है।

आस्था और रहस्य का अद्भुत संगम

निरई माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, रहस्य और परंपराओं का अद्भुत संगम है। यहां की हर मान्यता, हर चमत्कार भक्तों के विश्वास को और मजबूत करता है।

सच कहा जाए तो यह दरबार सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि वह शक्ति है जो भक्तों के लिए असंभव को संभव बना देती है।

महानदी पुल के नीचे मिला युवक का शव

0

मिली जानकारी के अनुसार, प्रेमलाल कल शाम अपने एक दोस्त के साथ घर से निकला था। बताया जा रहा है कि निसदा मोड़ के पास वह आइसक्रीम खाने के लिए रुका।  इसके बाद से प्रेमलाल का कुछ पता नहीं चला और आज सुबह महानदी पुल के नीचे उसका शव मिलने की खबर आई।

भाई को भेजा था व्हाट्सएप मैसेज

घटना की सूचना मिलते ही आरंग पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। आरंग थाना प्रभारी हरीश साहू ने बताया कि मृतक अपनी कुछ शारीरिक समस्याओं के कारण काफी समय से मानसिक तनाव में था। मौत से पहले प्रेमलाल ने अपने भाई को व्हाट्सएप पर अपनी परेशानियों के बारे में मैसेज किया था, जिसे पुलिस सुसाइड एंगल से जोड़कर देख रही है। मृतक के शरीर पर प्रथम दृष्टया किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं।

फ़िलहाल पुलिस ने आत्महत्या की आशंका जताई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा।

हाईकोर्ट के निर्देश पर न्यायिक अधिकारियों का

0

बिलासपुर । CG NEWS: हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अनुशंसा के बाद रजिस्ट्रार जनरल ने प्रदेश के न्यायिक अधिकारियों के तबादले का बड़ा आदेश जारी किया है, जिससे कई जिलों में न्यायिक व्यवस्था में बदलाव देखने को मिलेगा। जारी सूची के अनुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश स्तर से लेकर सिविल जज तक कई अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है।

इस आदेश में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, रजिस्ट्रार न्यायिक, परिवार न्यायालय के न्यायाधीश सहित कई अहम पदों पर कार्यरत अधिकारियों को नए जिलों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही न्यायिक अकादमी और हाईकोर्ट से जुड़े पदों पर भी बदलाव किया गया है, जिससे प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

– Advertisement –

इसके अलावा सिविल जज जूनियर डिवीजन स्तर पर भी बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं, जिनमें कई अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में नई पोस्टिंग दी गई है। इस व्यापक फेरबदल का उद्देश्य न्यायिक कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और सुचारू बनाना बताया जा रहा है।

आदेश जारी होते ही संबंधित अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के तहत कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

– Advertisement –

Ad image