Thursday, March 12, 2026
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रायपुर के रांवाभाठा में नवनिर्मित गुरुद्वारे

रायपुर। GRAND NEWS : सिक्ख पंथ की सर्वोच्च संस्था के अध्यक्ष, एसजीपीसी के प्रधान हरजिंदर सिंह धामी एक दिवसीय प्रवास पर रायपुर पहुंचे, इस दौरान उन्होंने होटल बेबीलॉन इंटरनेशनल में छत्तीसगढ़ के सभी गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी, सामाजिक संस्थानों के पदाधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ में चल रहे सिक्ख समाज की गतिविधियों को लेकर चर्चा की। तत्पश्चात देवेंद्र नगर स्थित नमस्ते चौक पहुंचकर पूर्व विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा और सिख जनों से मुलाकात की, इसके बाद रायपुर के बिलासपुर रोड स्थित रांवाभाठा में नवनिर्मित भव्य ऐतिहासिक गुरुद्वारे का विधिवत रूप से उद्घाटन किया। साथ ही शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर के मार्गदर्शन में भव्य गुरमत संगीत विद्यालय का भी शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में सिख समाज से जुड़े बड़ी संख्या में वरिष्ठ पदाधिकारी, गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने गुरुद्वारे में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया और नए स्वरूप में तैयार हुए गुरुद्वारे के लिए शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में ग्रैंड ग्रुप के चेयरमैन व छत्तीसगढ़ टेनिस संघ के महासचिव गुरुचरण सिंह होरा विशेष रूप से मौजूद रहे।

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चेयरमैन होरा ने समाजसेवी जगजीत सिंह खनूजा की सराहना की

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एसजीपीसी के प्रमुख अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी जी आज रायपुर पहुंचे है, सिख समाज द्वारा एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। बेबीलॉन इंटरनेशनल होटल के हमारे सिख समाज के प्रमुख व समाजसेवी जगजीत सिंह खनूजा जी जो हमेशा सेवा कार्यों में जुटे रहते हैं, छत्तीसगढ़ के सभी गुरूद्वारे या भवन निर्माण में उनका सहयोग हमेसा रहता है, श्री खनूजा कभी भी अपने द्वारा किए गए योगदान को सामने नहीं आने देते, वह गुपचुप तरीके से सहयोग करते रहते है। उनके अथक प्रयास, समर्पण और सेवा भाव के कारण गुरुद्वारे के जीर्णोद्धार का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। श्री खनूजा ने समाज को संगठित कर न केवल निर्माण कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि पूरे प्रकल्प को नई दिशा देने में भी अहम योगदान दिया। साथ ही उन्होंने सिख फोरम के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा, पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा, जी.एस. भाम्बरा जी और गुरुद्वारे के प्रभारी अजीत सिंह समेत पुरे 16 गुरूद्वारे के अध्यक्ष व सचिव उपस्थित रहे, वे सभी को बधाई देते है।

उन्होंने आगे कहा कि विशेषकर गुरु नानक देव जी के नाम से यह गुरुद्वारा निर्मित हुआ है, निश्चित रूप से सांगत यहां निहाल करेंगे। इस गुरुद्वारे के उद्घाटन से लोगों को गुरु नानक देव जी के सिद्धांत, समानता, सेवा, भाईचारे और गुरु के द्वारा बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलेगी। गुरुद्वारा केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का केंद्र होता है। यह स्थान समाज में प्रेम, एकता और सद्भाव को सुदृढ़ करेगा।

गुरमत समागम में कीर्तन व गुरु इतिहास का वाचन

समारोह के दौरान दरबार साहिब के रागी जत्थों ने सिख गुरु गाथा का गुणगान कर संगत को निहाल किया। दोपहर तक चले गुरमत समागम में श्री दरबार साहिब के हजूरी रागी भाई स्वरूप सिंह ने कीर्तन किया, वहीं भाई गुरसेवक जीत सिंह के ढाढ़ी जत्थे ने गुरु इतिहास का वाचन किया। इसके पश्चात संगत के लिए लंगर की व्यवस्था की गई।

गुरमत संगीत विद्यालय में मिलेगा नि:शुल्क प्रशिक्षण

गुरुद्वारे के उद्घाटन के साथ ही यहां गुरमत संगीत विद्यालय की शुरुआत की गई है, जहां बच्चों को नि:शुल्क संगीत की शिक्षा दी जाएगी। खास बात यह है कि सभी समाजों के बच्चे इसमें भाग ले सकेंगे।

2004 में बना था गुरुद्वारा, अब मिला नया स्वरूप

बता दें कि यह गुरुद्वारा वर्ष 2004 में निर्मित हुआ था, लेकिन समय के साथ जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया था। इसके बाद व्यापक स्तर पर रिनोवेशन कराया गया। दरबार हॉल में नई पालकी साहिब स्थापित की गई, इंटीरियर का कार्य कराया गया तथा बेल्जियम से मंगाई गई करीब 4 लाख रुपये की कालीन बिछाई गई। भवन का रंग-रोगन किया गया और बाहर पंजाब से मंगवाया गया स्टील का खंडा स्थापित किया गया। साथ ही 100 फीट लंबा और 40 फीट चौड़ा विशाल लंगर भवन तैयार किया गया है। जरूरतमंदों के लिए 8 कमरों की सराय भी बनाई गई है, जहां रात्रि विश्राम की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।

उद्घाटन समारोह में राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा, पूर्व विधायक गुरुमुख सिंह होरा, पूर्व विधायक कुलदीप सिंह जुनेजा, सिख फोरम के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया, देवेंद्र नगर गुरुद्वारा अध्यक्ष दिलेर सिंह होरा, जी.एस. भाम्बरा, रेलवे स्टेशन गुरुद्वारा समिति के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह छाबड़ा, लवली अरोरा, दशमेष सेवा समिति केपरविंदर सिंह भाटिया, अध्यक्ष हरपाल सिंह भाम्बरा ( सलाहकार सदस्य -छत्तीसगढ़ सिंह संगठन ) दलजीत चावला, बंटी चावला, इंदरजीत छाबड़ा, कुलदीप चावला, बलजीत भाटिया, कल्याण पासरीजा एवं दलजीत चावला सहित सिख समाज के अनेक गणमान्यजन एवं विभिन्न गुरुद्वारों के प्रधान उपस्थित रहे।

 

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