Friday, May 15, 2026
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दमाखेड़ा को मिला नया नाम

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बलौदाबाजार-भाटापारा। CG NEWS: छत्तीसगढ़ में गांव का नाम बदला—दमाखेड़ा अब आधिकारिक रूप से ‘कबीर धर्म नगर दमाखेड़ा’ घोषित,छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य राजपत्र में अधिसूचना जारी कर बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील स्थित गांव दमाखेड़ा का नाम बदलकर ‘कबीर धर्म नगर दमाखेड़ा’ कर दिया है।

यह निर्णय मंत्रिपरिषद की बैठक (04 जून 2025) में लिए गए फैसले और भारत सरकार के गृह मंत्रालय की सहमति के बाद लागू किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी राजपत्र के अनुसार नाम परिवर्तन हिंदी और अंग्रेज़ी—दोनों में प्रभावी होगा, जिसमें देवनागरी में कबीर धर्म नगर, दमाखेड़ा और रोमन में KABIR DHARM NAGAR DAMAKHERA दर्ज किया गया है। अधिसूचना 5 फरवरी 2026 से लागू मानी जाएगी, जिसके बाद सभी शासकीय अभिलेखों, दस्तावेज़ों और प्रशासनिक कार्यों में नया नाम उपयोग में लाया जाएगा।

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छत्तीसगढ़ सरकार का फैसला: दमाखेड़ा को मिला नया नाम

21 लाख के आवास घोटाले में ठेकेदार गिरफ्तार

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कबीरधाम।CG News : न्यायधानी के पड़ोसी जिले कबीरधाम से भ्रष्टाचार की एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगाओं के उत्थान के नाम पर आए 21 लाख 50 हजार रुपये को अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत ने ‘हजम’ कर लिया। कवर्धा पुलिस ने इस सनसनीखेज घोटाले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए ठेकेदार को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि एक ‘सरकारी प्यादा’ अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।

फाइलों में बन गए मकान, जमीन पर एक ईंट भी नहीं

पूरा मामला तरेगांव जंगल थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुकरापानी का है। साल 2024 में ट्राइबल एवं बैगा आवास योजना के तहत सरकार ने गरीब परिवारों के लिए 21 लाख 50 हजार रुपये जारी किए थे। यह राशि इसलिए थी ताकि उन बैगा परिवारों को पक्की छत मिल सके जो बरसों से झोपड़ियों में रह रहे हैं। लेकिन अफसोस! मकान बनने से पहले ही पूरी रकम तकनीकी सहायक पवन चंद्रवंशी और ठेकेदार छोटूराम चंद्रवंशी की जेबों में चली गई।

कैसे हुआ खुलासा? एय्याशी में उड़ाए पैसे!

जब बैगा परिवारों ने मकान न बनने की शिकायत की, तब पुलिस की जांच में जो सच सामने आया वो चौंकाने वाला था। गिरफ्तार ठेकेदार छोटूराम ने कबूल किया कि उसने आवास के लिए आए पैसों से निर्माण सामग्री खरीदी और उसे अपने दूसरे प्राइवेट ठेकेदारी कार्यों में खपा दिया। पुलिस ने मौके से अहम दस्तावेज और मोबाइल जब्त किए हैं, जिनमें भ्रष्टाचार के गहरे राज दफन हैं।

फरार आरोपी की तलाश जारी

इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा पंचायत का तकनीकी सहायक पवन चंद्रवंशी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश कर रही है।

भारत में घटिया क्वालिटी बेचने का आरोप: सांसद

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नई दिल्ली,रायपुर । CG NEWS:  लोकसभा में नियम 377 के तहत एक बहुत ही अहम मुद्दा उठाते हुए, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारत में काम कर रही कई विदेशी कंपनियों की “दोहरी मानसिकता” की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि ये कंपनियाँ ऐसे प्रोडक्ट बेचती हैं जिनकी क्वालिटी पश्चिमी बाजारों में बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की तुलना में काफी कम होती है।

बृजमोहन ने इन दोहरे मापदंडों के पक्के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि जो बेबी फूड यूरोप के बाजारों में बिकता है. उसमें अलग से कोई चीनी नहीं होती। लेकिन हैरानी की बात है कि वहीं ब्रांड जब भारतीय माताओं को अपना सामान बेचते हैं, तो वह चीनी से भरा होता है। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय उत्पादों में कोको बटर जैसी प्रीमियम चीजों को अक्सर सस्ते वनस्पति तेल से बदल दिया जाता है।

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सांसद ने जोर देकर कहा कि ऐसी हरकतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ के सपने को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को खराब सामान खपाने के लिए “डंपिंग ग्राउंड” नहीं बनाया जा सकता और देश के नागरिकों की सेहत देश के भविष्य के लिए सबसे ज्यादा जरनी है।

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, “हमारे नागरिकों की सेहत ही देश का भविष्य है। हम यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे कि ग्लोबल ब्रांड्स भारत में तो ज्यादा चीनी वाला बेबी फूड या सस्ते तेल का इस्तेमाल करें, लेकिन विदेशों में अच्छी क्वालिटी बनाए रखें। अब समय आ गया है कि FSSAI पूरी दुनिया में ‘एक ब्रांड, एक क्वालिटी का नियम सख्ती से लागू करे। भारत दुनिया का एक लीडर है, न कि घटिया उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड।”

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अग्रवाल ने केंद्र सरकार से तुरंत ये कदम उठाने की अपील कीः

1. FSSAI नियमों में बदलावः खाने की सुरक्षा और क्वालिटी के मौजूदा नियमों को और सख्त किया जाए।

2. वैश्विक समानता (Global Parity) लागू हो: यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत में काम करने वाला कोई भी ग्लोबल ब्रांड ठीक उसी क्यालिटी का पालन करे जो वह अपने मूल देश (country of origin) में करता है।

3. कड़ी निगरानीः ऐसे कम पोषण वाले उत्पादों की बिक्री रोकी जाए जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करते

07 Feb 2026 – PRESS RELEASE

बहुराष्ट्रीय कंपनियां यूरोप और दुनिया के बाकी

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नई दिल्ली, 07 फरवरी 2026 : MP Brijmohan : लोकसभा में नियम 377 के तहत एक बहुत ही अहम मुद्दा उठाते हुए, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारत में काम कर रही कई विदेशी कंपनियों की “दोहरी मानसिकता” की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि ये कंपनियाँ ऐसे प्रोडक्ट बेचती हैं जिनकी क्वालिटी पश्चिमी बाजारों में बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की तुलना में काफी कम होती है।

बृजमोहन ने इन दोहरे मापदंडों के पक्के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि जो बेबी फूड यूरोप के बाजारों में बिकता है. उसमें अलग से कोई चीनी नहीं होती। लेकिन हैरानी की बात है कि वहीं ब्रांड जब भारतीय माताओं को अपना सामान बेचते हैं, तो वह चीनी से भरा होता है। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय उत्पादों में कोको बटर जैसी प्रीमियम चीजों को अक्सर सस्ते वनस्पति तेल से बदल दिया जाता है।

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सांसद ने जोर देकर कहा कि ऐसी हरकतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ के सपने को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को खराब सामान खपाने के लिए “डंपिंग ग्राउंड” नहीं बनाया जा सकता और देश के नागरिकों की सेहत देश के भविष्य के लिए सबसे ज्यादा जरनी है।

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, “हमारे नागरिकों की सेहत ही देश का भविष्य है। हम यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे कि ग्लोबल ब्रांड्स भारत में तो ज्यादा चीनी वाला बेबी फूड या सस्ते तेल का इस्तेमाल करें, लेकिन विदेशों में अच्छी क्वालिटी बनाए रखें। अब समय आ गया है कि FSSAI पूरी दुनिया में ‘एक ब्रांड, एक क्वालिटी का नियम सख्ती से लागू करे। भारत दुनिया का एक लीडर है, न कि घटिया उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड।”

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अग्रवाल ने केंद्र सरकार से तुरंत ये कदम उठाने की अपील की –

1. FSSAI नियमों में बदलावः खाने की सुरक्षा और क्वालिटी के मौजूदा नियमों को और सख्त किया जाए।

2. वैश्विक समानता (Global Parity) लागू हो: यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत में काम करने वाला कोई भी ग्लोबल ब्रांड ठीक उसी क्यालिटी का पालन करे जो वह अपने मूल देश (country of origin) में करता है।

3. कड़ी निगरानीः ऐसे कम पोषण वाले उत्पादों की बिक्री रोकी जाए जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करते

बहुराष्ट्रीय कंपनियां यूरोप और दुनिया के बाकी देशों के

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नई दिल्ली, 07 फरवरी 2026 : लोकसभा में नियम 377 के तहत एक बहुत ही अहम मुद्दा उठाते हुए, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भारत में काम कर रही कई विदेशी कंपनियों की “दोहरी मानसिकता” की कड़ी आलोचना की। उन्होंने बताया कि ये कंपनियाँ ऐसे प्रोडक्ट बेचती हैं जिनकी क्वालिटी पश्चिमी बाजारों में बेचे जाने वाले प्रोडक्ट की तुलना में काफी कम होती है।

बृजमोहन ने इन दोहरे मापदंडों के पक्के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि जो बेबी फूड यूरोप के बाजारों में बिकता है. उसमें अलग से कोई चीनी नहीं होती। लेकिन हैरानी की बात है कि वहीं ब्रांड जब भारतीय माताओं को अपना सामान बेचते हैं, तो वह चीनी से भरा होता है। उन्होंने आगे बताया कि भारतीय उत्पादों में कोको बटर जैसी प्रीमियम चीजों को अक्सर सस्ते वनस्पति तेल से बदल दिया जाता है।

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सांसद ने जोर देकर कहा कि ऐसी हरकतें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत’ के सपने को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत को खराब सामान खपाने के लिए “डंपिंग ग्राउंड” नहीं बनाया जा सकता और देश के नागरिकों की सेहत देश के भविष्य के लिए सबसे ज्यादा जरनी है।

रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि, “हमारे नागरिकों की सेहत ही देश का भविष्य है। हम यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे कि ग्लोबल ब्रांड्स भारत में तो ज्यादा चीनी वाला बेबी फूड या सस्ते तेल का इस्तेमाल करें, लेकिन विदेशों में अच्छी क्वालिटी बनाए रखें। अब समय आ गया है कि FSSAI पूरी दुनिया में ‘एक ब्रांड, एक क्वालिटी का नियम सख्ती से लागू करे। भारत दुनिया का एक लीडर है, न कि घटिया उत्पादों का डंपिंग ग्राउंड।”

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अग्रवाल ने केंद्र सरकार से तुरंत ये कदम उठाने की अपील की –

1. FSSAI नियमों में बदलावः खाने की सुरक्षा और क्वालिटी के मौजूदा नियमों को और सख्त किया जाए।

2. वैश्विक समानता (Global Parity) लागू हो: यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत में काम करने वाला कोई भी ग्लोबल ब्रांड ठीक उसी क्यालिटी का पालन करे जो वह अपने मूल देश (country of origin) में करता है।

3. कड़ी निगरानीः ऐसे कम पोषण वाले उत्पादों की बिक्री रोकी जाए जो लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करते

सायरन बजाती एंबुलेंस में मरीज नहीं, कुछ और ही सामान था

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भरत सिंह चौहान, जांजगीर चांपा। CG Crime : छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। शिवरीनारायण थाना क्षेत्र में ट्रांसफार्मर, कॉपर और एल्युमिनियम केबल चोरी करने वाले एक अंतरजिला संगठित गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि कुछ की तलाश जारी है।

खौफनाक रातों का कबाड़ किंग गिरफ्तार

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दरअसल, जनवरी माह में रोड दुरपा और लोहर्सी क्षेत्र में ट्रांसफार्मरों से सैकड़ों किलो कॉपर वायर चोरी की घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद शिवरीनारायण थाना में मामला दर्ज कर विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्य, मुखबिर तंत्र और लगातार पतासाजी के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी अमर बाबू उर्फ कुंदन वानी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया।

एंबुलेंस से करते थे तस्करी

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आरोपी पहले क्षेत्र में घूमकर ट्रांसफार्मरों और केबल की रेकी करते थे, मोबाइल से फोटो लेकर योजना बनाते थे और रात में पिकअप वाहन व एंबुलेंस के रूप में तैयार बोलेरो से चोरी का माल ले जाते थे ताकि किसी को संदेह न हो। चोरी किए गए कॉपर और एल्युमिनियम वायर को कबाड़ में खपाया जाता था।

17 लाख 30 हजार का माल जब्त 

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने मुलमुला, अकलतरा, बलौदा बाजार और बिलासपुर सहित कई क्षेत्रों में 10 से अधिक वारदातों को अंजाम दिया है। आरोपियों के कब्जे से ट्रांसफार्मर, कॉपर-एल्युमिनियम वायर, चार मोबाइल, छोटा हाथी और बोलेरो एंबुलेंस सहित कटर मशीन व अन्य औजार जब्त किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब 17 लाख 30 हजार रुपये बताई जा रही है।

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संगठित अपराध की धारा 111 बीएनएस भी जोड़ी है और सभी गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। शिवरीनारायण पुलिस की यह कार्रवाई मजबूत सूचना तंत्र और सतत निगरानी का परिणाम मानी जा रही है।

21 Naxalites surrendered : अमित शाह के दौरे से पहले सुकमा में टूटी नक्सलवाद की कमर, 76 लाख के इनामी 21 खूंखार माओवादियों ने डाले हथियार

Raipur Breaking : रायपुर की फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड, आसमान में छाया काला धुआं; दमकल की गाड़ियां मौके पर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘बस्तर पंडुम

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बस्तर-जगदलपुर । Bastar Pandum-2026 : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज सुबह बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर पहुँचीं, जहाँ उन्होंने संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम-2026 का शुभारंभ किया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस अवसर पर कहा कि आदिवासियों की संस्कृति में छत्तीसगढ़ की आत्मा बसती है। उन्होंने बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के जयघोष के साथ अपने उद्बोधन की शुरूआत की। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जहाँ सरकार अपनी संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और प्राचीन विरासतों को संरक्षित करने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजन कर रही है। यह आयोजन आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति का जीवंत प्रतिबिंब है।

जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित इस शुभारंभ समारोह में बड़ी संख्या में आदिवासी कलाकार और विशाल जनसमूह मौजूद रहा। सभी को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रदेश की विष्णुदेव सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से जनजातीय उत्थान के लिए निरंतर बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम जनमन, प्रधानमंत्री जनजातीय गौरव उत्कर्ष अभियान तथा नियद नेल्ला नार जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

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राष्ट्रपति ने बस्तर क्षेत्र में आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जनजातीय बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने के लिए शासन के साथ-साथ समाज और उनके माता-पिता को भी आगे आना होगा। उन्होंने बस्तर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राचीन परंपराओं की जड़ें आज भी मजबूत हैं। बस्तर पंडुम जनजातीय समुदाय की पहचान, गौरव और समृद्ध परंपराओं को प्रोत्साहित करने वाला एक महत्वपूर्ण मंच है। राष्ट्रपति ने बताया कि बस्तर पंडुम में 54 हजार से अधिक आदिवासी कलाकारों ने पंजीयन कराया है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।

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उन्होंने कहा कि हिंसा का मार्ग छोड़कर माओवादी मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं, लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था बढ़ रही है। वर्षों से बंद विद्यालय पुनः खुल रहे हैं, दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़कें और पुल-पुलियों का निर्माण हो रहा है तथा ग्रामीणजन विकास से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की सुंदरता और संस्कृति सदैव लोगों के आकर्षण का केंद्र रही है, किंतु दुर्भाग्यवश चार दशकों तक यह क्षेत्र माओवाद से ग्रस्त रहा, जिससे यहां के निवासियों को अनेक कष्ट झेलने पड़े।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत सरकार की माओवादी आतंक के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई के परिणामस्वरूप वर्षों से व्याप्त भय, असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण अब समाप्त हो रहा है। माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़ रहे हैं और नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है। प्रदेश सरकार के प्रयासों और स्थानीय लोगों के सहयोग से आज बस्तर में विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। गाँव-गाँव में बिजली, सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँच रही हैं। वर्षों से बंद विद्यालयों में अब बच्चों की कक्षाएँ फिर से संचालित हो रही हैं। राष्ट्रपति ने उपस्थित जनसमूह से अपनी संस्कृति और पारंपरिक विरासतों को सहेजने का आह्वान करते हुए बस्तर की जनजातीय परंपराओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बस्तर पंडुम जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव – राज्यपाल

राज्यपाल रमेन डेका शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर पंडुम कोई साधारण मेला नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय लोक संस्कृति का उत्सव है। यहाँ के लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा, आभूषण, ढोल-नगाड़े और पारंपरिक व्यंजन मिलकर बस्तर की सुंदर तस्वीर दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने कहा कि गौर नृत्य, परघौनी नृत्य तथा धुरवा, मुरिया, लेजा जैसे नृत्य बस्तर की सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। इस प्रकार के आयोजन हमारी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पहचान उसकी जनजातीय संस्कृति और परंपराओं से है। गोंड, मुरिया, माड़िया, हल्बा, भतरा एवं परजा समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी मूल परंपराओं को सहेजते आए हैं। जल, जंगल और जमीन के साथ सामंजस्य बस्तर की सबसे बड़ी ताकत है। बस्तर पंडुम के माध्यम से कलाकारों को पहचान, सम्मान और आजीविका के अवसर मिलेंगे। लोककला तभी जीवित रहेगी जब कलाकार खुशहाल होंगे।

राज्यपाल डेका ने कहा कि ढोकरा कला छत्तीसगढ़ की शान है। बस्तर में निर्मित ढोकरा शिल्प की मूर्तियाँ देश-विदेश में लोकप्रिय हैं। यह कला जनजातीय शिल्पकारों की संस्कृति, मेहनत और कौशल का प्रमाण है। बस्तर की संस्कृति केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की लोक परंपराओं और विविधताओं का प्रतीक है।

बस्तर समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती – मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर पंडुम में आना केवल औपचारिक उपस्थिति नहीं, बल्कि बस्तर के लिए आशीर्वाद, जनजातीय समाज के लिए सम्मान और माताओं-बहनों के लिए अपनत्व है। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के जीवन, आस्था, बोली-भाषा, नृत्य-गीत, वेशभूषा, खान-पान और जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतिबिंब है। बस्तर केवल जंगलों की धरती नहीं, बल्कि समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की धरती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर पंडुम के लिए इस वर्ष 12 विधाओं में 54 हजार से अधिक कलाकारों ने पंजीयन कराया, जिनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वेशभूषा-आभूषण, शिल्प, चित्रकला, व्यंजन, पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य और वन-औषधियाँ शामिल हैं, जो बस्तर की संस्कृति की जीवंतता और समृद्धि को दर्शाती हैं।

अब नया बस्तर – डर की जगह भरोसा, हिंसा की जगह विकास

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि एक समय था जब बस्तर को नक्सलवाद और हिंसा के लिए जाना जाता था, लेकिन आज डर की जगह भरोसे ने और हिंसा की जगह विकास ने ले ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने कहा कि जहाँ कभी गोलियों की आवाज़ गूँजती थी, आज वहाँ स्कूलों की घंटी बजती है। जहाँ कभी तिरंगा नहीं लहरा पाता था, आज वहाँ राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। गणतंत्र दिवस पर बस्तर संभाग के अति-संवेदनशील गाँवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया, जो लोकतंत्र और संविधान की जीत है।

नियद नेल्ला नार, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा अभियान विकास के मील के पत्थर

मुख्यमंत्री ने कहा कि नियद नेल्ला नार योजना, प्रधानमंत्री जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान आदिवासी क्षेत्रों में विकास के मील के पत्थर हैं। इन योजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएँ पहुँची हैं। नई पुनर्वास नीति के से जो लोग कभी बंदूक के रास्ते पर थे, वे अब सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। चिल्कापल्ली, तेमेनार और हांदावाड़ा जैसे गाँवों में वर्षों बाद बिजली पहुँची है, यह केवल रोशनी नहीं, बल्कि आशा और भविष्य का उजाला है।

जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर और वैश्विक पहचान दिलाना हमारी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर की पहचान वनोपज से भी है। तेंदूपत्ता संग्रहण दर बढ़ाई गई है, चरण-पादुका योजना पुनः प्रारंभ की गई है तथा वन धन केंद्रों के माध्यम से वनोपज को उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बस्तर के धुड़मारास गाँव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँवों में शामिल किया गया है। चित्रकोट, तीरथगढ़, कांगेर घाटी और कोटमसर गुफाएँ केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान हैं।

युवा अब हथियार नहीं, खेल और कला से बना रहे पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन यह सिद्ध करते हैं कि बस्तर के युवा अब हथियार नहीं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से अपनी पहचान बना रहे हैं। लाखों युवाओं और महिलाओं की भागीदारी इस बदलाव का सबसे सशक्त प्रमाण है।

बस्तर की नई पहचान को मजबूत करने का आह्वान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका बस्तर आगमन ऐतिहासिक है। इससे कलाकारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बेटियों के सपनों को उड़ान मिलेगी और बस्तर को नई ऊर्जा प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर बस्तर को शांति, समृद्धि और संस्कृति का केंद्र बनाएँगे, जिस पर पूरे देश को गर्व हो। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वागत भाषण दिया।

कोंडागांव बस्तर पंडुम पर आधारित लघु वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया तथा कोण्डागांव और बास्तानार के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक किरणदेव सिंह, सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी, कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित जनप्रतिनिधिगण, गायता, पुजारी, मांझी-चालकी, बस्तर पंडुम के कलाकार एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रायपुर की फैक्ट्री में भीषण अग्निकांड,

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रायपुर। Raipur Breaking : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का औद्योगिक इलाका भनपुरी आज सुबह दहल उठा। यहाँ स्थित एक तार फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई है। आग इतनी भयावह है कि इसकी लपटें और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से ही आसमान में साफ देखा जा सकता है। पूरा इलाका काले धुएं की चादर से ढंक गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है।

फैक्ट्री बनी आग का गोला

जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री के भीतर रखे ज्वलनशील पदार्थों के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। घटना के वक्त फैक्ट्री में काम चल रहा था या नहीं, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो पाई है, लेकिन आग की तीव्रता को देखकर आसपास की फैक्ट्रियों और रिहायशी इलाकों में हड़कंप मच गया है। लोग डर के मारे अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए हैं।

दमकल की टीमें मोर्चे पर

आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके के लिए रवाना कर दी गई हैं। पुलिस की टीम ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है और आवाजाही रोक दी गई है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग इतनी भयंकर है कि दमकल कर्मियों को पास जाने में भी भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

तबाही का वीडियो वायरल

इस घटना के रोंगटे खड़े कर देने वाले वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में आग की लपटें फैक्ट्री की छतों को फाड़कर बाहर निकलती दिख रही हैं। फिलहाल आग लगने का सटीक कारण अज्ञात है, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से यह हादसा हुआ होगा।

पढ़ाई की जगह बच्चों से फिकवाया जा रहा कचरा

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CG School Video : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है, जिसने विभाग के दावों की पोल खोल दी है। कोटा विकासखंड के अंतर्गत आने वाले बानाबेल संकुल की शासकीय प्राथमिक शाला पंडरा पथरा में गुरुजी की बड़ी लापरवाही और संवेदनहीनता देखने को मिली।

नियमों की उड़ी धज्जियां

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जानकारी के अनुसार, स्कूल समय के दौरान सुबह करीब 11:15 बजे, जब बच्चों को कक्षाओं में पढ़ाई करनी चाहिए थी, तब उनसे स्कूल परिसर की सफाई कराई जा रही थी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पांच मासूम बच्चे बाल्टियों में कचरा भरकर बाहर फेंक रहे हैं, वहीं दो अन्य बच्चे कमरों में झाड़ू लगा रहे हैं।​नियमों के मुताबिक, स्कूल परिसर में बच्चों से किसी भी प्रकार का शारीरिक श्रम या साफ-सफाई कराना पूरी तरह प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ के शिक्षकों ने इन नियमों को ताक पर रख दिया।

‘शिक्षा का मंदिर’ कहे जाने वाले स्कूल में बच्चों के साथ हो रहे इस व्यवहार ने अब गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, पूरे जिले में हड़कंप मच गया और अभिभावकों सहित ग्रामीणों ने शिक्षकों के खिलाफ कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। अब सबकी नजरें शिक्षा विभाग पर टिकी हैं कि क्या इन लापरवाह शिक्षकों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘बस्तर पंडुम

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जगदलपुर। Bastar Pandum-2026 Live : बस्तर के सांस्कृतिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने माई दन्तेश्वरी की पावन धरा पर कदम रखते ही तीन दिवसीय ‘बस्तर पंडुम-2026’ का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं के इस महाकुंभ के आगाज़ के साथ ही पूरा बस्तर उत्सव के रंग में सराबोर हो गया है।

उद्घाटन समारोह के दौरान मंच पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रेमन डेका, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन साहू, कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, गजेन्द्र यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व स्थानीय विधायक किरण सिंह देव सहित कई वरिष्ठ नेता और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पूरे बस्तर में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है।

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