कबीरधाम।CG News : न्यायधानी के पड़ोसी जिले कबीरधाम से भ्रष्टाचार की एक ऐसी रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगाओं के उत्थान के नाम पर आए 21 लाख 50 हजार रुपये को अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत ने ‘हजम’ कर लिया। कवर्धा पुलिस ने इस सनसनीखेज घोटाले में पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए ठेकेदार को सलाखों के पीछे भेज दिया है, जबकि एक ‘सरकारी प्यादा’ अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
फाइलों में बन गए मकान, जमीन पर एक ईंट भी नहीं
पूरा मामला तरेगांव जंगल थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुकरापानी का है। साल 2024 में ट्राइबल एवं बैगा आवास योजना के तहत सरकार ने गरीब परिवारों के लिए 21 लाख 50 हजार रुपये जारी किए थे। यह राशि इसलिए थी ताकि उन बैगा परिवारों को पक्की छत मिल सके जो बरसों से झोपड़ियों में रह रहे हैं। लेकिन अफसोस! मकान बनने से पहले ही पूरी रकम तकनीकी सहायक पवन चंद्रवंशी और ठेकेदार छोटूराम चंद्रवंशी की जेबों में चली गई।
कैसे हुआ खुलासा? एय्याशी में उड़ाए पैसे!
जब बैगा परिवारों ने मकान न बनने की शिकायत की, तब पुलिस की जांच में जो सच सामने आया वो चौंकाने वाला था। गिरफ्तार ठेकेदार छोटूराम ने कबूल किया कि उसने आवास के लिए आए पैसों से निर्माण सामग्री खरीदी और उसे अपने दूसरे प्राइवेट ठेकेदारी कार्यों में खपा दिया। पुलिस ने मौके से अहम दस्तावेज और मोबाइल जब्त किए हैं, जिनमें भ्रष्टाचार के गहरे राज दफन हैं।
फरार आरोपी की तलाश जारी
इस घोटाले का मास्टरमाइंड माना जा रहा पंचायत का तकनीकी सहायक पवन चंद्रवंशी गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया है। पुलिस की टीमें उसकी तलाश कर रही है।



