भारतेन्दु कौशिक, बिलासपुर। CG News : जिले के सरकारी स्कूलों में शौचालय निर्माण को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश और तय समय-सीमा के बावजूद सैकड़ों स्कूलों में आज भी शौचालय अधूरे पड़े हैं। इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है, खासकर छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दरअसल, स्कूलों में शौचालय की कमी को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने 15 जून तक सभी स्कूलों में शौचालय निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बिलासपुर जिले के 350 स्कूलों में शौचालयों की मरम्मत अधूरी है, जबकि 175 स्कूलों में नए शौचालयों का निर्माण अब तक पूरा नहीं हो पाया है। कुल मिलाकर जिले के 525 स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों को शौचालय की सुविधा नहीं मिल रही है। सबसे ज्यादा दिक्कत छात्राओं को हो रही है, जिन्हें मजबूरी में खुले में या झाड़ियों में जाना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल उनकी गरिमा और सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद गंभीर है।
शासन ने इस काम के लिए 2 करोड़ 31 लाख रुपये की स्वीकृति दी थी। आरईएस को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई और पहली किश्त के रूप में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि भी जारी की गई। इसके बावजूद तय समय पर काम पूरा नहीं किया जा सका। बाद में यह जिम्मेदारी जिला और जनपद पंचायतों को सौंपी गई। इस विषय में जब जिला पंचायत सीईओ संदीप कुमार अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि लगभग 200 स्कूलों के कार्य अभी अपूर्ण हैं और 45 कार्य शुरू नहीं हो पाए हैं। सभी काम जल्द पूरे कर लिए जाएंगे।
एक तरफ स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बच्चे खुले में जाने को मजबूर हैं। अब सवाल यही है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद आखिर कब तक बच्चे इस लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे?




