रायपुर। CG VIDEO : बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री उर्फ बाबा बागेश्वर सरकारी विमान से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुंचे, जहां ड्यूटी पर लगे थाना प्रभारी को बाबा के पैर छूना भारी पड़ गया है। ऑन-ड्यूटी TI मनीष तिवारी का पंडित धीरेंद्र शास्त्री से मुलाकात के दौरान पैर छूने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो के सामने आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए TI मनीष तिवारी को लाइन अटैच कर दिया गया है।
A self-styled godman, Bageshwar, is being flown around in a #Chhattisgarh govt aircraft for his events.
State police are deployed for his security and every bit of this privilege is paid for by public money.
Taxpayers are funding religious theatrics, while the line between… pic.twitter.com/uwQsIOesZn
— India With Congress (@UWCforYouth) December 26, 2025
जानकारी के अनुसार, जब धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री रायपुर एयरपोर्ट पहुंचे थे, उस समय सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी निभा रहे TI मनीष तिवारी ने पहले उन्हें सलामी दी और इसके बाद सार्वजनिक रूप से उनके पैर छू लिए। यह पूरा घटनाक्रम वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। देखते ही देखते यह वीडियो वायरल हो गया और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली तथा वर्दीधारी अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे।
वीडियो वायरल होने के बाद रायपुर SSP लाल उमेद सिंह ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया। पुलिस विभाग के सेवा नियमों और आचार संहिता के अनुसार, ड्यूटी के दौरान वर्दीधारी अधिकारी को पूर्णत: निष्पक्ष, तटस्थ और मर्यादित आचरण का पालन करना होता है। किसी भी धार्मिक, राजनीतिक या व्यक्तिगत आस्था का सार्वजनिक प्रदर्शन ड्यूटी के समय वर्दी में करना नियमों के विरुद्ध माना जाता है। इसी आधार पर TI मनीष तिवारी को लाइन अटैच कर दिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि वर्दी केवल एक पद नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का प्रतीक होती है। पुलिस अधिकारी व्यक्तिगत जीवन में अपनी आस्था और विश्वास का पालन कर सकते हैं, लेकिन ड्यूटी के दौरान वर्दी में रहते हुए ऐसा कोई आचरण नहीं होना चाहिए जिससे विभाग की निष्पक्षता और गरिमा पर सवाल खड़े हों। इस प्रकरण में यही बात सबसे अहम मानी गई।
पुलिस विभाग की इस त्वरित कार्रवाई को एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुशासन सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे मामला कितना ही संवेदनशील या चर्चित क्यों न हो। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में छोटी-सी चूक भी विभाग की छवि को प्रभावित कर सकती है, इसलिए सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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