Tuesday, March 3, 2026
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गरियाबंद में शिव महापुराण का दिव्य प्रसंग, हजारों भक्त हुए भाव-विभोर, संत इंद्रदेव जी महाराज के प्रवचन ने बांधा समां

 

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गरियाबंद। गरियाबंद के ऐतिहासिक गांधी मैदान में देवांगन परिवार द्वारा आयोजित श्री शिव महापुरााण ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिवस का दिव्य वातावरण आज श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह से सराबोर रहा। हजारों भक्तों की उपस्थिति में सुप्रसिद्ध कथावाचक संत श्री इंद्रदेव जी महाराज (वृंदावन) ने शिव महापुराण का विस्तृत परिचय, शिवलिंग स्थापना की पौराणिक विधि तथा भस्म–रुद्राक्ष धारण की महिमा का मंगल उपदेश प्रदान किया।

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कथा स्थल पर आज छत्तीसगढ़ के प्रथम पंचायत मंत्री रहे पंडित अमितेश शुक्ल एवं जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने पहुँचकर पूज्य महाराज श्री से आशीर्वाद ग्रहण किया।

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महाराज श्री ने अपने प्रवचन में कहा कि—
“बूंद पर्वत पर गिरती है पर टिकती नहीं, वह धारा बनकर बह जाती है। जैसे जल ऊँचे स्थान पर नहीं रुकता, वैसे ही जिनके भीतर अहंकार है, उनके जीवन में भगवान का ज्ञान भी स्थिर नहीं होता। झुकना ही जीवन का सौंदर्य है—जिसने झुकना सीख लिया, समझो उसने जगत को जीत लिया, क्योंकि अकड़ तो केवल मुर्दों की पहचान है।”

प्रवचन के दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि कौशल प्रदेश (छत्तीसगढ़) न होता तो न राजा दशरथ का ससुराल और न ही प्रभु श्रीराम का ननिहाल इस धरा पर होता। उन्होंने कहा—
“छत्तीसगढ़ 36 गढ़ों के संगम से बना है। यहां के लोग कुशल, सरल और शांत स्वभाव वाले हैं। हमारी संस्कृति को जीवित रखने हेतु ऐसा विराट पंडाल लगाया गया है, ताकि समाज की बुराइयाँ दूर हों, और मानव के भीतर दिव्यता, पवित्रता तथा सौंदर्य का उदय हो।”

कथा के समापन में जब पूज्य महाराज श्री ने भजन—
“गजब कर डाला मेरे भोले ने, सारी दुनिया में चंदा का उजाला…”
गाया, तो पूरा पंडाल झूम उठा। भक्तों की ताल, जयकारों और नृत्य से पूरा वातावरण शिवमय हो गया।

कथा का क्रम आगे भी प्रतिदिन जारी रहेगा। श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर इस आध्यात्मिक अनुष्ठान का लाभ लेने की अपील की गई है।

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