बिलासपुर। CG NEWS : छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में गर्मी ने अभी पूरी तरह दस्तक भी नहीं दी है, लेकिन शहर की प्यास बुझाने वाले इंतजाम दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र के पुराने मोहल्लों से लेकर निगम में शामिल हुए नए वार्डों तक, इन दिनों पानी की भारी किल्लत और दूषित सप्लाई ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। नलों से आ रहे मटमैले और बदबूदार पानी ने न केवल लोगों के किचन का बजट बिगाड़ा है, बल्कि पीलिया और डायरिया जैसी बीमारियों का डर भी पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों के बढ़ते आक्रोश के बीच अब इस मुद्दे पर निगम की सियासत भी गरमा गई है, जहाँ विपक्ष प्रशासन की तैयारियों को शून्य बता रहा है।
बिलासपुर नगर निगम के विभिन्न क्षेत्रों में जल आपूर्ति की स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। शहर के कई इलाकों में सुबह के वक्त महज कुछ मिनटों के लिए ही पानी की सप्लाई हो रही है, और वह भी इतनी प्रदूषित है कि उसे पीने तो दूर, नहाने के काम में लाना भी मुश्किल हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति उन नए वार्डों की है जहाँ हाल ही में पाइपलाइन बिछाई गई है। यहाँ ड्रेनेज सिस्टम और पाइपलाइन के बीच उचित तालमेल न होने के कारण नालियों का गंदा पानी नलों तक पहुँच रहा है। कई जगहों पर पाइपलाइनें जमीन के ऊपर खुले में बिछी हुई हैं, जो न केवल तकनीकी रूप से गलत है, बल्कि लीकेज के कारण संक्रमण का मुख्य स्रोत बनी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत के बावजूद अधिकारियों का रवैया उदासीन बना हुआ है, जिससे जनता में भारी नाराजगी है। दूसरी ओर, इस गंभीर समस्या ने नगर निगम के गलियारों में राजनीतिक रार भी तेज कर दी है नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप ने निगम प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि अमृत मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद जनता को साफ पानी नहीं मिलना प्रशासन की विफलता है।
हालांकि, सत्तापक्ष और सभापति विनोद सोनी का दावा है कि जहाँ भी दूषित पानी की शिकायत मिल रही है, वहां युद्ध स्तर पर मरम्मत कार्य जारी है।
निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने तकनीकी खामियों को स्वीकारते हुए प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के जरिए वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब शुरुआती गर्मी में ही शहर का यह हाल है, तो आने वाले मई-जून के तपते महीनों में प्रशासन इस चुनौती से कैसे निपटेगा।




