नई दिल्ली। Namrata Shirodkar: हिंदी सिनेमा में कम उम्र में कदम रखकर पहचान बनाने वाली नम्रता शिरोडकर आज भले ही फिल्मों से दूर हों, लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।

22 जनवरी को 54वां जन्मदिन मना रहीं नम्रता ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट अपने करियर की शुरुआत की थी और एक्टिंग उन्हें विरासत में मिली, क्योंकि उनकी दादी मीनाक्षी शिरोडकर अपने दौर की मशहूर मराठी अभिनेत्री थीं, जिन्होंने जीनत अमान और शर्मिला टैगोर से पहले बिकिनी पहनकर बड़ा साहसिक कदम उठाया था।

नम्रता ने 1977 में ‘शिरडी के साईं बाबा’ में बाल कलाकार के रूप में काम किया, पढ़ाई के बाद मॉडलिंग में आईं और महज 21 साल की उम्र में 1993 में फेमिना मिस इंडिया का ताज जीता, साथ ही मिस यूनिवर्स में छठा स्थान हासिल किया। इसके बाद बॉलीवुड के दरवाजे उनके लिए खुले और 1998 में ‘जब प्यार किसी से होता है’ से डेब्यू किया, जबकि 1999 में संजय दत्त के साथ फिल्म ‘वास्तव’ ने उन्हें असली पहचान दिलाई।
हालांकि करियर में ‘पुकार’, ‘अस्तित्व’, ‘कच्चे धागे’, ‘तेरा मेरा साथ रहे’ और ‘एलओसी कारगिल’ जैसी फिल्में करने के बावजूद उनकी ज्यादातर फिल्में औसत रहीं, लेकिन दक्षिण भारतीय सिनेमा में फिल्म ‘वामसी’ के दौरान महेश बाबू से मुलाकात ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। पांच साल की दोस्ती और रिश्ते के बाद दोनों ने शादी कर ली और नम्रता ने फिल्मों से दूरी बनाकर परिवार को प्राथमिकता दी।
आज वह दो बच्चों के साथ खुशहाल जिंदगी जी रही हैं और करोड़ों की संपत्ति की मालकिन हैं, जहां महेश बाबू की नेटवर्थ करीब 350 करोड़ और नम्रता की 50 करोड़ बताई जाती है।
दिलचस्प बात यह भी है कि उनकी पहली फिल्म ‘पूरब की लैला पश्चिम की छैला’ बड़े बजट और अक्षय कुमार-सुनील शेट्टी जैसे सितारों के बावजूद रिलीज से पहले ही बंद हो गई थी। नम्रता शिरोडकर की कहानी इस बात की मिसाल है कि शोहरत से ज्यादा सुकून और परिवार को चुनना भी एक बड़ी सफलता हो सकती है।



