CG NEWS : धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र नगरी ब्लॉक के ग्राम उमरगांव में रंगों के पर्व होली के उत्साह के बीच आस्था का एक अद्भुत और रोमांचकारी दृश्य देखने को मिला। यहां होलिका दहन की अग्नि शांत होने के बाद अगली सुबह श्रद्धालु धधकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास की अनोखी मिसाल पेश करते हैं।
सालों पुरानी इस परंपरा के अनुसार, होलिका दहन की रात अग्नि प्रज्वलित की जाती है और सुबह जब लकड़ियां अंगारों में बदल जाती हैं, तब ग्रामीण विधिवत पूजा-अर्चना के बाद अंगारों पर चलते हैं। इस दौरान गांव में भक्ति गीतों और जयकारों की गूंज माहौल को और भी आध्यात्मिक बना देती है।
ग्रामीणों का मानना है कि यह केवल साहस का नहीं, बल्कि अटूट विश्वास का प्रतीक है। उनका कहना है कि अंगारों पर चलते समय उन्हें किसी प्रकार की जलन या पीड़ा का अनुभव नहीं होता, बल्कि एक अद्भुत आत्मिक शांति का एहसास होता है।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेते हैं। युवाओं में भी इस अनूठी रस्म को लेकर खासा उत्साह देखा जाता है।
होलिका दहन के दौरान पूरे गांव में उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। विभिन्न मंडलियों के लोग नगाड़ों की गूंज के साथ पारंपरिक फाग गीत गाते हुए झूम उठे। विधिवत पूजा-पाठ के पश्चात शीतला पुजारी सुरेश मरकाम एवं सभी मंडलियों का स्वागत ग्राम सुरक्षा समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार मारकोले, पूर्व सरपंच मोहन पुजारी, सामाजिक कार्यकर्ता महेश अग्रवाल, चंद्रभान यादव और हरिश्चंद्र साहू सहित बड़ी संख्या में उपस्थित ग्रामीणों ने किया और होलिका दहन की इस परंपरा के निर्वहन में अपना योगदान दिया।
आस्था, साहस और सामूहिक विश्वास का यह संगम उमरगांव की पहचान बन चुका है। जहां एक ओर होली रंगों और उमंग का संदेश देती है, वहीं यहां की यह परंपरा श्रद्धा की अग्नि में विश्वास की परीक्षा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।




