बिलासपुर। Chhattisgarh : भूविस्थापितों को राहत देते हुए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित भूमि स्वामियों को पुनर्वास व रोजगार से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को भूमि अधिग्रहण की तिथि पर लागू राज्य पुनर्वास नीति का पालन करने का निर्देश एसईसीएल को दिया है।
बिलासपुर हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा, भूमि अधिग्रहण से प्रभावित व्यक्तियों को पुनर्वास और रोजगार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से स्वाभाविक रूप से जुड़ा हुआ है। इस अधिकार से मनमाने ढंग से वंचित किया जाना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रविंद्र कुमार वर्मा ने कहा, भूविस्थापितों को पुनर्वास नीति के तहत रोजगार दिया जाना महत्वपूर्ण अधिकार है। भूमि अधिग्रहण की तिथि से यह नीति लागू हो जाती है।
इस नीति की भूमि अधिग्रहण करने वाली कंपनी या संस्था अनदेखी नहीं कर सकती। एसईसीएल के भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास को लेकर दायर याचिका पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा, पुनर्वास और रोजगार का अधिकार अनुच्छेद 21 का तार्किक परिणाम है और रोजगार से इनकार करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के साथ-साथ अनुच्छेद 21 का भी उल्लंघन करता है।
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