गरियाबंद। Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में कांग्रेस संगठन की हालिया नियुक्ति सूची को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। मैनपुर ब्लॉक के इंदागांव मंडल अध्यक्ष की सूची में एक दिवंगत नेता का नाम शामिल होने से संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस इसे तकनीकी त्रुटि बता रही है, वहीं विपक्ष इसे संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ते संवाद-गैप का उदाहरण मान रहा है।
सूची में ऐसा नाम, जो अब हमारे बीच नहीं
कांग्रेस द्वारा जारी सूची में स्वर्गीय रूपेंद्र सोम को इंदागांव मंडल अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि उनका निधन 22 अगस्त 2025 को हो चुका है। स्व. रूपेंद्र सोम संगठन के कर्मठ और समर्पित नेता रहे हैं तथा वे पूर्व में आदिवासी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे चुके थे।
दिवंगत नेता के नाम की नियुक्ति सूची में मौजूदगी ने न केवल संगठन को असहज स्थिति में डाल दिया, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं को भी चौंका दिया है।
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तकनीकी चूक या जमीनी जानकारी की अनदेखी?
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या जिला और प्रदेश स्तर के बीच सूचना के आदान-प्रदान में कहीं चूक रह गई। संगठन से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि सूची जारी करने से पहले स्थानीय स्तर पर एक बार सत्यापन कर लिया जाता, तो इस तरह की स्थिति से आसानी से बचा जा सकता था।
कार्यकर्ताओं में मौन असंतोष
घटना के बाद स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असहजता और मौन असंतोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि एक वरिष्ठ नेता के निधन की जानकारी संगठन के शीर्ष स्तर तक समय पर नहीं पहुंच पाना, संगठनात्मक संपर्क की कमजोरी को दर्शाता है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसे मामलों से संगठन की गंभीरता और संवेदनशीलता पर प्रश्नचिन्ह लगता है।
विपक्ष ने कसा तंज
विपक्षी दल भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर तंज कसा है और इसे संगठन की जमीनी पकड़ कमजोर होने का संकेत बताया है। चुनावी माहौल और संगठन विस्तार के दौर में इस तरह की प्रशासनिक चूक कांग्रेस के लिए छवि संबंधी चुनौती बन सकती है।
कांग्रेस का पक्ष
इस पूरे मामले पर जिला कांग्रेस कमेटी गरियाबंद के जिलाध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने सफाई देते हुए बताया कि, 21 जुलाई को प्रदेश स्तर से संगठन सृजन के तहत मंडल अध्यक्षों के नाम भेजने के निर्देश मिले थे। 30 जुलाई को सभी मंडलों के नाम भेज दिए गए थे। इसके बाद 22 अगस्त को रूपेंद्र सोम का देहांत हो गया। अब उनके स्थान पर मनुराम महाकुल का नाम प्रस्तावित कर भेज दिया गया है। यह एक तकनीकी खामी है, जिसे जल्द सुधार लिया जाएगा।
मंथन की जरूरत
हालांकि कांग्रेस इसे मानवीय और तकनीकी भूल मान रही है, लेकिन यह घटना संगठन के भीतर जमीनी संवाद, सूचना सत्यापन और समन्वय की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करती है। अब नजर इस बात पर है कि पार्टी इस चूक से क्या सबक लेती है और आगे ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।
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