जांजगीर-चांपा। CG NEWS:छत्तीसगढ़ की काशी में नशे का साम्राज्य! 3 किमी दूर थाना… फिर भी बेखौफ सौदागर। जी हा यह है छत्तीसगढ़ की काशी कहे जाने वाले पावन नगरी खरौद… जहां कभी आस्था की घंटियां गूंजती थीं, आज वहां नशे का धुआं उठ रहा है! जहां संस्कृति थी… वहां अब सन्नाटा है। जहां संस्कार थे… वहां अब शराबियों का जमावड़ा है। और हैरानी की बात ये है कि यह सब हो रहा है, शिवरीनारायण थाना से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर!
गौर से देखिए इन तस्वीरों को ये तस्वीर कही और कि नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की तस्वीर है! जहां जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस प्रशासन अपराधों पर अंकुश लगाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? हकीकत ये है कि नगर पंचायत खरौद में खुलेआम अवैध कच्ची महुआ शराब…
गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। छोटे-छोटे मासूम बच्चे…, स्कूल जाने वाले युवा.. और यहां तक कि बुजुर्ग भी…
नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। नगर में अशांति है… डर है… और सबसे ज्यादा दर्द है उन मांओं के दिल में, जो अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद होते देख रही हैं।
तो वही दूसरी तरफ.. जब प्रशासन ने नहीं सुना… तो सैकड़ों महिलाएं खुद सड़क पर उतर आईं। महिलाओं का साफ आरोप है – बार-बार शिकायत के बावजूद पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की। नतीजा? नशे के सौदागरों के हौसले और बुलंद हो गए।
बता दे कि कुछ दिन पहले इन्हीं महिलाओं ने महिला कमांडो के साथ मिलकर नशे के खिलाफ जागरूकता रैली निकाली।
लेकिन उस रैली के दौरान एक नशे के सौदागर ने महिला कमांडो पर प्राणघातक हमला कर दिया!
घायल महिला कमांडो का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ… आरोपी गिरफ्तार हुआ… जेल भी गया.. लेकिन सवाल वही है – क्या सिर्फ एक गिरफ्तारी से नशे का कारोबार खत्म हो गया?
जवाब है – नहीं!
जहां आज फिर सैकड़ों महिलाएं शिवरीनारायण थाना पहुंचीं। हाथ में ज्ञापन… आंखों में आंसू… और दिल में आक्रोश। नगर के महिलाओं का मांग साफ है नगर पंचायत खरौद में रोज पेट्रोलिंग पार्टी भेजी जाए,
अवैध शराब और गांजा बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई हो, बच्चों के भविष्य को बचाया जाए, लेकिन जब मीडिया ने थाना प्रभारी से बात करने की कोशिश की… तो उन्होंने कैमरे से दूरी बना ली।
अब सवाल उठता है – क्या पुलिस की खामोशी ही नशे के कारोबारियों की ताकत बन चुकी है? ये सिर्फ एक खबर नहीं है… ये एक शहर की पुकार है। ये उन मांओं की चीख है, जो अपने बच्चों को नशे की दलदल में डूबता देख रही हैं।
छत्तीसगढ़ की काशी कही जाने वाली इस पावन धरती को आखिर कब मिलेगा नशे से छुटकारा? कब जागेगा प्रशासन? और कब टूटेगा नशे का ये काला जाल? या फिर… ऐसे ही महिलाएं सड़क पर उतरती रहेंगी… और सिस्टम चुपचाप तमाशा देखता रहेगा? यह देखने वाली बात है।




