गांजा बिक्री के संदेह में पकड़े गए नाबालिग को छोड़ने के बदले रिश्वत लेने का आरोप, SSP ने तुरंत की कार्रवाई
बिलासपुर। CRIME NEWS: कोटा थाना क्षेत्र से पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि गांजा बिक्री के संदेह में पकड़े गए एक नाबालिग को थाने लाकर कथित रूप से 80 हजार रुपये लेकर छोड़ दिया गया। मामले की भनक लगते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर साहू को निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार शाम को कोटा पुलिस टीम ने रानीसागर क्षेत्र में दबिश दी थी। इस दौरान एक नाबालिग को हिरासत में लिया गया, जिस पर गांजा बेचने से जुड़ा होने का संदेह जताया गया था। उसे पूछताछ के लिए थाने लाया गया। बताया जा रहा है कि नाबालिग का पिता गांव में अवैध रूप से गांजा बेचने का काम करता है। बेटे के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही वह सक्रिय हो गया।
आरोप है कि नाबालिग को छोड़ने के एवज में पुलिसकर्मियों ने पहले 2 लाख रुपये की मांग की। बाद में सौदेबाजी के बाद 80 हजार रुपये में बात तय हुई। परिजनों ने गांव में ब्याज पर रकम की व्यवस्था कर पुलिसकर्मियों को सौंप दी। इसके बाद नाबालिग को थाने से छोड़ दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, यह कथित लेनदेन कोटा के मुख्य चौक स्थित एक जूता दुकान में हुआ, जहां रानीसागर पारा निवासी नाबालिग के परिवार से बातचीत के बाद रकम ली गई। रकम मिलने के बाद नाबालिग को रिहा कर दिया गया।
मामला सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी रजनेश सिंह ने प्रधान आरक्षक प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। एसएसपी ने स्पष्ट कहा है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं थानेदार की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। कोटा टीआई नरेश चौहान को भी स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। विभागीय स्तर पर जांच जारी है और पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
यह मामला पुलिस की साख पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे साफ होगा कि आरोप कितने सही हैं और आगे किस स्तर तक कार्रवाई की जाएगी।




