रायपुर में 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस मनाया गया। 2007 में इसी दिन छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा देने वाला विधेयक पारित किया था, और जुलाई 2008 में इसे राजकाज और प्राथमिक शिक्षा में लागू कराने के लिए छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग का गठन किया गया। हालांकि, दो साल बाद आयोग का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग कर दिया गया और वर्तमान में यह सात वर्षों से बिना अध्यक्ष और सदस्यों के संचालित हो रहा है। राज्य गठन के 25 साल और विधेयक पारित होने के 18 साल बाद भी छत्तीसगढ़ी के साथ न्याय नहीं हो सका है। नंदकिसोर सुकुल के अनुसार, केंद्र और राज्य के बीच भाषा के आधार पर राज्य की श्रेणी निर्धारण में छत्तीसगढ़ को ख की जगह क श्रेणी में रखा गया, जिससे छत्तीसगढ़ी की स्थिति प्रभावित हुई और आज भी इसकी अस्मिता की लड़ाई जारी है। राज्य की पहचान उसकी मातृभाषा, संस्कृति और छत्तीसगढ़ महतारी से जुड़ी है, लेकिन सरकारी प्रणाली में लगातार छत्तीसगढ़ी के साथ उपेक्षा और छल होता रहा है।
छत्तीसगढ़ी राजभाषा: 18 साल बाद भी अधूरी न्याय यात्रा
News Desk